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	<title>संबंध &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>कोरोना को लेकर मन में बैठे भ्रम को तोड़ें, न कि रिश्ते-नातों को</title>
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		<pubDate>Sat, 22 May 2021 16:14:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="167" height="184" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/04/Dr.Suryakant-1.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" />-कोरोना से मौत के बाद सम्मान से करें अंतिम विदाई -नदियों में शव को प्रवाहित करने से बढ़ सकता है प्रदूषण -प्रोटोकाल के साथ अंतिम संस्कार में नहीं है कोई खतरा सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो लखनऊ। कोविड ने हमारी इंसानियत और संस्कारों पर भी गहरी चोट पहुंचाई है। नदियों में उतराते शव इस बात की स्पष्ट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="167" height="184" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/04/Dr.Suryakant-1.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" />
<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-कोरोना से मौत के बाद सम्मान से करें अंतिम विदाई</strong><strong></strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-नदियों में शव को प्रवाहित करने से बढ़ सकता है प्रदूषण </strong><strong></strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-प्रोटोकाल के साथ अंतिम संस्कार में नहीं है कोई खतरा </strong><strong></strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignright size-large"><img decoding="async" loading="lazy" width="238" height="263" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/04/Dr.Suryakant.png" alt="" class="wp-image-28100"/><figcaption><strong><em><span class="has-inline-color has-vivid-red-color">डॉ. सूर्य कान्त</span></em></strong></figcaption></figure></div>



<p><strong>सेहत टाइम्&#x200d;स ब्&#x200d;यूरो</strong><strong></strong></p>



<p><strong>लखनऊ। </strong>कोविड ने हमारी इंसानियत और संस्कारों पर भी गहरी चोट पहुंचाई है। नदियों में उतराते शव इस बात की स्पष्ट गवाही देते हैं कि कोरोना ने सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार के हक़ को भी छीन लिया है। इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक कारण है कि लोगों में अनजाना भय घर कर गया है कि शव को हाथ लगाने या करीब जाने से वह भी कोरोना की चपेट में आ सकते हैं। इस भ्रान्ति को पूरी तरह से दूर करने की कोशिश की है किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष व आईएमए-एमएस के वाइस चेयरमैन डॉ. सूर्य कान्त ने।</p>



<p>किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डेथ ऑडिट कमेटी के सदस्य डॉ. सूर्य कान्त का स्पष्ट कहना है कि कोरोना का वायरस खांसने और छींकने से निकलने वाली बूंदों से फैलता है और एक मुर्दा न तो खांस सकता है और न ही छींक सकता है तो ऐसे में लोगों को भ्रम तोड़ने की जरूरत है न कि रिश्ता-नाता। कोरोना के चलते निधन वाले व्यक्ति के अंतिम संस्कार में पूरे प्रोटोकाल का पालन करते हुए शामिल होने से संक्रमण का खतरा नहीं रहता है। उन्होंने कहा कि यदि फिर भी डर लग रहा है तो डबल मास्क लगाइए या गमछे को कई परत कर मुंह और नाक को अच्छी तरह से ढंक लीजिये और हाथों में पहनने को ग्लब्स नहीं मिलता है तो उसकी जगह पर पन्नी को हाथों में अच्छी तरह से बाँध लीजिये और एक बाल्टी में साबुन पानी पहले से घोलकर रख लीजिये, शव के अंतिम संस्कार के बाद साबुन-पानी से हाथों को अच्छी तरह से धो लीजिये और उसके बाद अच्छी तरह से नहा लीजिये। इंसानियत के नाते शव को नदियों में प्रवाहित करने से बचिए नहीं तो उससे और भी प्रदूषण बढ़ेगा, क्योंकि पीने से लेकर खेतों की सिंचाई में उसी पानी का इस्तेमाल होता है। उससे और भी बीमारी के जन्म लेने का खतरा पैदा हो जाता है।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:25px"><strong>सेनेटाइज और रैप कर ही दी जाती है डेड <strong>बॉडी</strong>   </strong></p>



<p>डॉ. सूर्य कान्त का कहना है कि कोरोना के चलते होने वाली मौत के मामलों में सबसे पहले डेड बॉडी को एक फीसद हाइपोक्लोराइट के घोल से अच्छी तरह से विसंक्रमित किया जाता है। इसके बाद उसे पूरी तरह से रैप करके और पंचनामा करके ही परिवार वालों को सुपुर्द किया जाता है। परिवार के लोग भी मृत व्यक्ति का केवल चेहरा देख सकते हैं, पूरे शरीर को खोलने या नहलाने आदि की अनुमति नहीं होती। इसके अलावा मृत्यु के कुछ समय बाद वायरस का असर अपने आप भी ख़त्म होने लगता है। डेड बॉडी पहले से भी पूरी तरह सेनेटाइज होती है, इसलिए सतह पर भी संक्रमण की गुंजाइश नहीं होती। इसलिए लोगों को अपनों के अंतिम संस्कार में पूरे प्रोटोकाल का पालन करते हुए भाग लेने से कोरोना के चपेट में आने के भ्रम को दूर कर देना चाहिए और विचार करना चाहिए कि जिससे इतने लम्बे समय का नाता रहा कम से कम उसको अंतिम विदाई तो पूरे आदर और सम्मान के साथ दें।</p>



<p>पिछले एक साल से अधिक समय से कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि इसी तरह किसी उपचाराधीन की मदद से भी लोगों को कतराना नहीं चाहिए क्योंकि जब चिकित्सक न जाने कितने अनजान लोगों का पूरी सावधानी के साथ इलाज में जुटे हैं तो आप भी पूरी सावधानी के साथ अपनों की मदद को आगे आएं। उनका कहना है कि यकीन मानें, अगर इस दौरान ट्रिपल लेयर मास्क पहनें,  उपचाराधीन की कोई वस्तु को छूने के बाद साबुन-पानी या सेनेटाइजर से अच्छी तरह से हाथ धुलते हैं और दो गज की दूरी बनाये रखते हैं तो संक्रमण का खतरा नहीं रहता। इसके अलावा अगर कोई कोरोना पॉजिटिव है तो उसे छिपाना नहीं चाहिए बल्कि बताना चाहिए ताकि मिलने-जुलने वाले अतिरिक्त सावधानी अपनाकर मिल-जुल सकें।</p>
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