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	<title>वैकल्पिक &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>एक्‍यूट रोगों में एलोपैथी और क्रॉनिक में अल्‍टरनेटिव मेडिसिन कारगर : ले.ज. डॉ बिपिन पुरी</title>
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		<pubDate>Sat, 02 Jul 2022 21:27:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="448" height="301" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11.jpg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11-300x202.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" />-दो दिवसीय नेशनल होम्‍योपैथिक कॉन्‍फ्रेंस में केजीएमयू के कुलपति ने कहा, मिलजुल कर कार्य करने की जरूरत सेहत टाइम्‍स लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ बिपिन पुरी ने कहा है कि हम एलोपेथी विधा के लोग जब इलाज करते हैं तो हम एक्‍यूट ट्रीटमेंट तो कर देते हैं लेकिन क्रॉनिक बीमारियों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="448" height="301" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11.jpg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11-300x202.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" />
<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-दो दिवसीय नेशनल होम्&#x200d;योपैथिक कॉन्&#x200d;फ्रेंस में केजीएमयू के कुलपति ने कहा, मिलजुल कर कार्य करने की जरूरत</strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-full"><img decoding="async" loading="lazy" width="448" height="301" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11.jpg" alt="" class="wp-image-35965" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11.jpg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11-300x202.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.11-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" /></figure></div>



<p><strong>सेहत टाइम्&#x200d;स </strong><strong></strong></p>



<p><strong>लखनऊ।</strong> किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ बिपिन पुरी ने कहा है कि हम एलोपेथी विधा के लोग जब इलाज करते हैं तो हम एक्&#x200d;यूट ट्रीटमेंट तो कर देते हैं लेकिन क्रॉनिक बीमारियों का इलाज ठीक से नहीं कर पाते हैं, मैं समझता हूं कि अल्&#x200d;टरनेटिव मेडिसिन में यह गैप भरने की ताकत है। उन्&#x200d;होंने कहा कि हमें मिलकर कार्य करने की आवश्&#x200d;यकता है।</p>



<p>डॉ पुरी ने यह बात यहां अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफि&#x200d;क कन्&#x200d;वेंशन सेंटर में शनिवार से आयोजित दो दिवसीय नेशनल होम्&#x200d;योपैथिक कॉन्&#x200d;फ्रेंस 2022 के पहले दिन मुख्&#x200d;य अतिथि के रूप में शामिल होकर अपने सम्&#x200d;बोधन में कही। इस कॉन्&#x200d;फ्रेंस का आयो&#x200d;जन होम्&#x200d;योपैथिक फ्रैटरनिटी ऑफ इंडिया द्वारा होम्&#x200d;योपैथी के जनक डॉ सीएफएस हैनिमैन की पुण्&#x200d;यतिथि (2 जुलाई) पर किया गया। डॉ पुरी ने कहा कि अल्टरनेटिव मेडिसिन जिसके बारे में भारत सरकार भी बात करती है, अल्टरनेटिव मेडिसिन की अहमियत आज समझी जा रही है।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि साथ ही हमें यह भी समझना है कि यह टाइम है एविडेंस बेस्ड मेडिसिन का। उन्होंने कहा कि यह मेरा आप सभी से आग्रह है और यह मैं दिल्ली आयुष में भी कह चुका हूं कि एविडेंस इसलिए जरूरी है कि दवा को हम रीप्रोड्यूस करके साबित कर सकें कि इस दवा से असर हो रहा है। उन्&#x200d;होंने कहा कि जिस दवा के बारे में आंकड़े होते हैं उसका असर पड़ता है। इससे पूर्व अपने भाषण की शुरुआत में डॉ पुरी ने कहा कि केजीएमयू परिवार की तरफ से मैं आप सबका अभिनंदन करता हूं यह हॉल हमारे यूनिवर्सिटी का ज्ञान का एक मंदिर है और आप सब ने यहां आकर इसे सुशोभित किया है।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>साक्ष्&#x200d;य आधारित इलाज करें : डॉ गिरीश गुप्&#x200d;ता</strong><strong></strong></p>



<p>समारोह की शुरुआत आयो&#x200d;जन सचिव डॉ रेनू महेन्&#x200d;द्र के स्&#x200d;वागत भाषण से हुई। पैट्रन डॉ गिरीश गुप्&#x200d;ता ने अपने सम्&#x200d;बोधन में कहा कि लखनऊ के लिए गर्व की बात है कि नेशनल कॉन्&#x200d;फ्रेंस का आयोजन ऐतिहासिक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर बने साइंटिफि&#x200d;क कन्&#x200d;वेंशन सेंटर में हो रहा है। कोविड के बाद पिछले दो वर्षों से पूरे विश्&#x200d;व में कॉन्&#x200d;फ्रेंस जैसी एक्टिविटी नहीं हो सकी थीं। इस लम्&#x200d;बे समय के बाद नवाबों के शहर के लिए मशहूर लखनऊ को यह सम्&#x200d;मेलन करने का सौभाग्&#x200d;य प्राप्&#x200d;त हुआ। उन्&#x200d;होंने कहा कि इस कॉन्&#x200d;फ्रेंस का मुख्&#x200d;य उद्देश्&#x200d;य होम्&#x200d;योपैथी को विज्ञान की मुख्&#x200d;य धारा में लाना है। उन्&#x200d;होंने चिकित्&#x200d;सकों का आह्वान करते हुए कहा कि 21वीं शताब्&#x200d;दी में सिर्फ और सिर्फ साक्ष्&#x200d;य आधारित दवा ही टिक सकेगी। मेरी सभी चिकित्&#x200d;सकों से अपील है कि आप अगर छोटी सी क्&#x200d;लीनिक भी चला रहे हैं तो भी साक्ष्&#x200d;य आधारित इलाज करें जिससे कि समाज में यह मैसेज जाये कि होम्&#x200d;योपैथी दवा का वैज्ञानिक आधार है।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-large"><img decoding="async" loading="lazy" width="1024" height="447" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.4-1024x447.jpg" alt="" class="wp-image-35958" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.4-1024x447.jpg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.4-300x131.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.4-768x335.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.4-1536x670.jpg 1536w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.4-2048x893.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure></div>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>होम्&#x200d;योपैथी के माध्&#x200d;यम से पहुंच सकते हैं जन-जन तक</strong><strong></strong></p>



<p>आयोजन के उपाध्&#x200d;यक्ष डॉ सर्वदमन सिंह ने कहा कि समारोह में पूरे भारत वर्ष से 1200 डेलीगेड्स आये हैं, उन्&#x200d;होंने कहा कि होम्&#x200d;योपैथी के माध्&#x200d;यम से हम जन-जन तक पहुंच सकते हैं। सरकार ने हमारी बहुत मदद की है लेकिन जिस स्&#x200d;तर तक मदद होनी चाहिये थी, वह नहीं हुई है। उन्&#x200d;होंने कहा कि प्रदेश भर की सभी 1588 डिस्&#x200d;पेंसरी में किसी में भी जांच की सुविधा नहीं है। इसी प्रकार उन्&#x200d;होंने होम्&#x200d;योपैथी की पढ़ाई की गुणवत्&#x200d;ता को भी अच्&#x200d;छा बनाने पर जोर दिया। उन्&#x200d;होंने कहा कि गिने-चुने लोगों की बात छोड़ दें तो आज कोई भी होम्&#x200d;योपैथिक चि&#x200d;कित्&#x200d;सक अपने बच्&#x200d;चे को होम्&#x200d;योपैथी डॉक्&#x200d;टर नहीं बल्कि ऐलोपैथिक डॉक्&#x200d;टर बनाना चाहता है। डॉ गिरीश गुप्&#x200d;ता, डॉ नरेश अरोरा, डॉ शेखर टंडन ने अपने बेटे को जरूर होम्&#x200d;योपैथिक डॉक्&#x200d;टर बनाया है, लेकिन ऐसे लोग गिने-चुने हैं इसका कारण है कि ऐलोपैथी में आज शिक्षा का स्&#x200d;तर अच्&#x200d;छा है, सुविधाएं हैं। उन्&#x200d;होंने कहा कि मेरा सरकार से अनुरोध है कि होम्&#x200d;योपैथी शिक्षा देने वाले टीचर को छह माह का कोर्स ऐलोपैथी में करने की व्&#x200d;यवस्&#x200d;था करनी चाहिये।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>जर्मन नहीं</strong><strong>, भारतीय चिकित्&#x200d;सा पद्धति है होम्&#x200d;योपैथी </strong><strong></strong></p>



<p>आयोजन के संयोजक डॉ बीएन आचार्य ने कहा कि होम्&#x200d;योपैथी भारतीय चिकित्&#x200d;सा पद्धति है, डॉ हैनि&#x200d;मैन जर्मनी में जरूर पैदा हुए लेकिन होम्&#x200d;योपैथी का सिद्धांत हमारे पुराणों में निहित रहा है श्रीमद भागवत ग्रंथ में भी कहा गया है कि प्राणियों को जिस प्रकार के पदार्थ के सेवन से रोग हुआ है उसी पदार्थ के चिकित्&#x200d;सीय सेवन से उसे ठीक किया जा सकता है। कालान्&#x200d;तर में डॉ हैनिमैन से इसे कर दिखाया। इस देश के लिए होम्&#x200d;योपैथिक पद्धति ही अनुकूल है।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने डॉ हैनिमैन की जीवनी के बारे में बताते हुए कहा कि वह बालक जो गरीबी में पला, वह विद्यार्थी जो पढ़ाकर अपना खर्च चलाता रहा, वह व्यक्ति जो 24 शहरों और कई देशों में घूमता रहा, जिस ने लगभग 90 दवाओं की क्लोनिंग की, 12 वॉल्यूम किताब के लिखे, 70 मौलिक निबंध लिखें, 24 वॉल्यूम्स का अनुवाद किया, 50000 से भी अधिक पन्नों का प्रकाशन किया, ऐसा व्यक्ति अंत में यह कहते हुए दुनिया से विदा हो गया कि मैं अनावश्यक ही नहीं जिया। उनकी मृत्&#x200d;यु &nbsp;पेरिस में हुई थी।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>होम्&#x200d;योपैथी के प्रति समर्पित हैं प्रधानमंत्री </strong><strong></strong></p>



<p>पटना से आये पैट्रन डॉ रामजी सिंह ने कहा कि&#x200d; उत्तर प्रदेश ऐसा पहला प्रांत है जहां आयुष यूनिवर्सिटी बन रही है, ज्ञात हो आयुष यूनिवर्सिटी गोरखपुर में बन रही है। उन्&#x200d;होंने कहा होम्योपैथी में सबसे ज्यादा कार्य उत्तर प्रदेश में हुआ है। उन्होंने कहा कि&#x200d; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी होम्&#x200d;योपैथी को लेकर बहुत समर्पित हैं, उनके घर में, उनकी पॉकेट में होम्&#x200d;योपैथी की दवा रहती है। उन्होंने कहा कि नरेन्&#x200d;द्र मोदी जब पहली बार प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने ही अपनी तरफ से आयुष विभाग की जगह आयुष मंत्रालय का गठन करवाया और मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में प्रधानमंत्री अलग से होम्योपैथिक मंत्रालय का गठन भी करवाएंगे।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>कोरोना से बचाने में 98 प्रतिशत कारगर रही होम्&#x200d;योपैथिक दवा</strong><strong></strong></p>



<p>नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ होम्योपैथी कोलकाता से आए डॉ सुभाष सिंह ने कहा कि हम लोगों ने कोरोना काल में एक बड़ी श्रम बस्ती धारावी में जब कोरोनावायरस हुआ तो वहां पर कैंप लगाए और 15000 परिवारों को &nbsp;दवा दी और और बाद में जब उसका विवरण लिया तब पाया गया कि 98% लोगों को कोरोना से बचाने में सफलता मिली, यह अपने आप में अनूठी बात है।</p>



<p>विधान परिषद सदस्य साकेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कि मेरा यहां पर प्रतिभाग करने आए विशेषकर नए चिकित्सकों से अनुरोध है कि वह कॉन्फ्रेंस में आए विद्वानों की बातों को अवश्य सुने क्योंकि उनके अनुभव से आपको बहुत लाभ मिल सकता है क्योंकि किताबों से ज्ञान तो मिल सकता है लेकिन अनुभव से जो मिलता है वह किताबों से नहीं मिलता है।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>होम्&#x200d;योपैथी की स्&#x200d;वीकार्यता बढ़ायें</strong><strong></strong></p>



<p>स्&#x200d;त्री रोग विशेषज्ञ बहराइच से विधायक डॉ प्रज्ञा त्रिपाठी ने कहा कि मुझे जब यहां कॉन्फ्रेंस में आने का निमंत्रण मिला तो मुझे बहुत खुशी हुई क्योंकि मैं यही केजीएमयू से पढ़ी हूं। होम्&#x200d;योपैथी के बारे में बोलते हुए कहा कि मुझे अंदाजा नहीं था कि कितने सिस्टम में आप लोग कार्य कर रहे हैं मैं पहले समझती थी कि आप लोग छोटी-मोटी बीमारियों के लिए ही काम करते होंगे लेकिन मैं गलत थी। उन्&#x200d;होंने कहा कि यह आपको सुनिश्चित करना है कि होम्योपैथी की स्वीकार्यता पूरे देश में कैसे बढ़ाई जाए। इसके लिए पूरा देश आपको देख रहा है। सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने आए हुए प्रतिभागियों से कहा कि यहां पर विद्वानों द्वारा जो भी बताया जाए उसे खूब अच्छे से समझ कर जाएं ताकि इसका लाभ आपको मिल सके।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि ऐसे रोग जिनको ठीक होने में बहुत टाइम लग जाता है उस पर जो होम्योपैथी में काम हुआ है इसके बारे में आप लोग अवश्य ही समझ कर जाएं। उन्&#x200d;होंने कहा कि एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री के बारे में सभी पैथी के बच्चों को पढ़ाया जाए जिससे कि वह बीमारी की तह तक पहुंच कर अच्छा इलाज कर सके इसके लिए शिक्षा प्रणाली में बदलाव होना चाहिए इसके लिए सभी लोग प्रयास करें। उन्होंने हमेशा अपना पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignright size-full is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.33.jpg" alt="" class="wp-image-35967" width="479" height="369" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.33.jpg 436w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.33-300x231.jpg 300w" sizes="(max-width: 479px) 100vw, 479px" /></figure></div>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>डॉ अनुरुद्ध वर्मा की स्&#x200d;मृ&#x200d;ति में वार्षिक एवॉर्ड घोषित</strong><strong></strong></p>



<p>कर्नाटक क्वालिफाइड होम्योपैथिक एसोसिएशन बैंगलोर से आए डॉक्टर बी डी पटेल ने अपनी संस्था की ओर से सेंट्रल काउंसिलिंग ऑफ होम्&#x200d;योपैथी के पूर्व सदस्&#x200d;य रह चुके उत्तर प्रदेश के डॉ अनुरुद्ध वर्मा की स्मृति में प्रतिवर्ष पुरस्कार देने की घोषणा की इसका पहला पुरस्कार डॉ आनंद चतुर्वेदी को दिया गया। ज्ञात हो डॉ अनुरुद्ध वर्मा की मौत 31 अक्&#x200d;टूबर, 2021 को हो गयी थी।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-full"><img decoding="async" loading="lazy" width="325" height="448" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.22.jpg" alt="" class="wp-image-35968" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.22.jpg 325w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/07/hom.22-218x300.jpg 218w" sizes="(max-width: 325px) 100vw, 325px" /></figure></div>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>प्रथम होम्&#x200d;योपैथिक रिसर्च फाउंडेशन लाइफ टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड 2022 &nbsp;डॉ आनंद चतुर्वेदी को</strong><strong></strong></p>



<p>शोध, शिक्षण को बढ़ावा देने, मेधावी छात्रों को प्रोत्&#x200d;साहित करने के उद्देश्&#x200d;य से 2004 में स्&#x200d;थापित होम्योपैथिक रिसर्च फाउंडेशन के अध्&#x200d;यक्ष डॉ गिरीश गुप्&#x200d;ता ने प्रथम होम्&#x200d;योपैथिक रिसर्च फाउंडेशन लाइफ टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड 2022 पूर्व निदेशक डॉ आनंद चतुर्वेदी को देने की घोषणा की। उन्&#x200d;होंने कहा कि डॉ आनंद चतुर्वेदी को उन्&#x200d;होंने पहली बार स्&#x200d;टूडेंट के रूप में देखा था। उन्&#x200d;होंने कहा कि डॉ आनंद ने स्टूडेंट, लेक्चरर, रीडर, प्रोफेसर, प्रिंसिपल के बाद डायरेक्टर तक का सफर तय किया है, प्रगति का इससे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है।</p>



<p>समारोह को पूर्व निदेशक प्रो बीएन सिंह ने भी सम्&#x200d;बोधित किया। मंच का कुशल संचालन डॉ पंकज श्रीवास्&#x200d;तव ने किया।</p>
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