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	<title>वातानुकूलित &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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		<title>बच्‍चे को मिट्टी में खेलने दीजिये, उसे एयरकंडीशन्‍ड चाइल्‍ड न बनायें</title>
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		<pubDate>Sun, 15 Sep 2019 12:17:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="614" height="347" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4444.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4444.jpg 614w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4444-300x170.jpg 300w" sizes="(max-width: 614px) 100vw, 614px" />होम्‍योपैथिक दवाओं के वैज्ञानिक पहलू को समझाना आवश्‍यक होम्‍योपैथिक साइंस सोसाइटी के तत्‍वावधान में होम्‍यो पीडियाकॉन का आयोजन सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो लखनऊ। बच्‍चा अगर स्‍वस्‍थ रहेगा तो समाज स्‍वस्‍थ होगा और जब समाज स्‍वस्‍थ होगा तो देश भी स्‍वस्‍थ होगा। इसी मूलमंत्र को आधार मानकर आज रविवार को देश भर से आये होम्‍योपैथिक विशेषज्ञों ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="614" height="347" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4444.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4444.jpg 614w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4444-300x170.jpg 300w" sizes="(max-width: 614px) 100vw, 614px" /><h5><span style="color: #0000ff;"><strong>होम्&#x200d;योपैथिक दवाओं के वैज्ञानिक पहलू को समझाना आवश्&#x200d;यक</strong></span></h5>
<h5><span style="color: #0000ff;"><strong>होम्&#x200d;योपैथिक साइंस सोसाइटी के तत्&#x200d;वावधान में होम्&#x200d;यो पीडियाकॉन का आयोजन</strong></span></h5>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="aligncenter size-full wp-image-14046" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo.jpg" alt="" width="4160" height="3120" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo.jpg 4160w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-768x576.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-1024x768.jpg 1024w" sizes="(max-width: 4160px) 100vw, 4160px" /></p>
<p><strong>सेहत टाइम्&#x200d;स ब्&#x200d;यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> बच्&#x200d;चा अगर स्&#x200d;वस्&#x200d;थ रहेगा तो समाज स्&#x200d;वस्&#x200d;थ होगा और जब समाज स्&#x200d;वस्&#x200d;थ होगा तो देश भी स्&#x200d;वस्&#x200d;थ होगा। इसी मूलमंत्र को आधार मानकर आज रविवार को देश भर से आये होम्&#x200d;योपैथिक विशेषज्ञों ने यहां गोमती नगर स्थित होटल लीनेज में अपने-अपने विचार रखे, मंथन किया तथा बच्&#x200d;चों की बीमारी में होम्&#x200d;योपैथी उपचार को लेकर विभिन्&#x200d;न प्रकार के रोगों पर चर्चा भी की। इस एक दिन के मंथन में जो अमृत निकला वह यह है कि होम्&#x200d;योपैथी को उसका सही मुकाम दिलाने के लिए मेहनत करनी होगी, होम्&#x200d;योपैथिक दवा कैसे काम करती है, इसे वैज्ञानिक तरीके से समझाना होगा। यह भी कहा गया कि बच्&#x200d;चों की जीवन शैली को मेहनतकश बनाने पर भी माता-पिता को गंभीर रूप से विचार कर उसे एयरकंडीशन्&#x200d;ड चाइल्&#x200d;ड बनने से रोकना होगा।</p>
<p>होम्&#x200d;यो पीडियाकॉन का आयोजन होम्&#x200d;योपैथिक साइंस सोसाइटी के तत्&#x200d;वावधान में किया गया। जिसका विषय था ‘रोल ऑफ होम्&#x200d;योपैथी इन पीडियाट्रिक डिजीज’। सम्&#x200d;मेलन के संयोजक डॉ अनुरुद्ध वर्मा ने बताया कि कॉन्&#x200d;फ्रेंस का उद्घाटन उत्&#x200d;तर प्रदेश राज्&#x200d;य सूचना आयुक्&#x200d;त सुभाष चंद्र सिंह ने दीप प्रज्&#x200d;ज्&#x200d;वलित कर होम्&#x200d;योपैथी के जनक डॉ सैमुअल हैनीमैन के चित्र पर माल्&#x200d;यार्पण करके किया। उनके साथ विशिष्&#x200d;ट अतिथि जयपुर होम्&#x200d;योपैथी मेडिकल कॉलेज के डॉ जेडी दनियानी, जयपुर होम्&#x200d;योपैथी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ अतुल कुमार सिंह, समारोह की अध्&#x200d;यक्षता करने वाले उत्&#x200d;तर प्रदेश होम्&#x200d;योपैथी मेडिकल बोर्ड के चेयरमैन प्रो बीएन सिंह, नेशनल होम्&#x200d;योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ अरविंद वर्मा तथा केन्&#x200d;द्रीय होम्&#x200d;योपैथी परिषद के पूर्व सदस्&#x200d;य व संयोजक डॉ अनुरुद्ध वर्मा शामिल रहे।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>तुरंत राहत वाली होम्&#x200d;योपैथिक दवायें हों तो क्&#x200d;या कहने&#8230;</strong></span></h6>
<p><strong> </strong>मुख्&#x200d;य अतिथि सुभाष चंद्र ने होम्&#x200d;योपैथी की महत्&#x200d;ता बताते हुए कहा कि ऐलोपैथी को बाजारवाद से जोड़ दिये जाने के कारण इसका चलन पूरी दुनिया में सबसे ज्&#x200d;यादा होता है। उन्&#x200d;होंने अपने व्&#x200d;यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए यह भी बताया कि पिछले दिनों उनकी पत्&#x200d;नी यहां केजीएमयू में भर्ती हुई थीं, उन्&#x200d;हें जो दवा दी जाती थी वह कभी असर करती थी तो कभी नहीं। उन्&#x200d;होंने जब इस बारे में विभागाध्&#x200d;यक्ष से बात की तो उन्&#x200d;होंने बताया कि एलोपैथी दवाओं से रोग का पूर्ण समाधान नहीं होता है, इसके साथ अपनी जीवन शैली, दिनचर्या और व्&#x200d;यायाम पर भी ध्&#x200d;यान देना जरूरी है। उन्&#x200d;होंने कहा कि अगर ऐसी होम्&#x200d;योपैथी दवाओं को लाया जाये जो तुरंत राहत दिला सकें तो यह बड़ी सफलता होगी।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>बच्&#x200d;चों को छुई-मुई बना दिया है माता-पिता ने </strong></span></h6>
<p>इससे पूर्व संयोजक डॉ अनुरुद्ध वर्मा ने स्&#x200d;वागत भाषण में आये हुए अतिथियों का स्&#x200d;वागत करते हुए कहा कि इसे सिर्फ पीडियाकॉन नहीं बल्कि होम्&#x200d;यो पीडियाकॉन नाम इसीलिए दिया गया है कि नाम से ही समझ आ जाये कि इसमें बच्&#x200d;चों के रोगों और रोग के कारणों पर चर्चा होगी। ऐसे कारण जिनका सीधा सम्&#x200d;बन्&#x200d;ध बड़ों से है, यानी उन कारणों के लिए बड़े जिम्&#x200d;मेदार हैं। इस पर सार्थक चर्चा ही इसका समाधान निकाल सकती है। उन्&#x200d;होंने कहा कि बच्&#x200d;चों में अनेक प्रकार की ऐसी समस्&#x200d;यायें हैं जो उनके लिए जानलेवा सिद्ध होती हैं, अकेले डायरिया से ही हर साल 10 लाख मौतें हो जाती हैं। दूसरी बड़ी समस्&#x200d;या कुपोषण है। उन्&#x200d;होंने कहा कि बच्&#x200d;चों को होने वाली समस्&#x200d;याओं का कारण आजकल होने वाला लालन-पोषण का तरीका है। बच्&#x200d;चों को छुई-मुई बना दिया गया है, माता-पिता अपने बच्&#x200d;चों को मिट्टी में खेलने नहीं देते हैं, जबकि यह देखा गया है मिट्टी में खेलने से बच्&#x200d;चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।</p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="aligncenter size-full wp-image-14047" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4.png.jpg" alt="" width="877" height="496" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4.png.jpg 877w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4.png-300x170.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-4.png-768x434.jpg 768w" sizes="(max-width: 877px) 100vw, 877px" /></p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>नौ किलो का बच्&#x200d;चा और 11 किलो का बस्&#x200d;ता </strong></span></h6>
<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि पहले तनाव, अवसाद जैसी बीमारियां बड़ों में पायी जाती थीं, अब हाल यह है कि ये बीमारियां बच्&#x200d;चों में भी होने लगी हैं, इसका बड़ा कारण पढ़ाई का बोझ जो उन पर कुछ ज्&#x200d;यादा ही डाल दिया गया है। बस्&#x200d;तों का हाल यह है कि 9 किलो का बच्&#x200d;चा और उसके स्&#x200d;कूल बैग का वजन 11 किलो, इसका दूसरा कारण है मोबाइल, माता-पिता भी इसे बड़े गर्व से बताते हैं कि मेरा बेटा मोबाइल चलाता है, उसी में मस्&#x200d;त रहता है। उन्&#x200d;होंने कहा कि मोबाइल ने बच्&#x200d;चों से उनका बचपन छीन लिया है। बच्&#x200d;चों में हिंसा, गुस्&#x200d;सा, झूठ बोलने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>सिर्फ दांत तक ही सीमित नहीं है कैल्&#x200d;केरिया फॉस</strong></span></h6>
<p>विशिष्&#x200d;ट अतिथि डॉ जेडी दरियानी ने अपने सम्&#x200d;बोधन में कहा कि आज जरूरत है होम्&#x200d;योपैथिक दवाओं से होने वाले फायदे को वैज्ञानिक तरीके से समझाने की। उन्&#x200d;होंने कहा कि दवा के फायदे के बारे में वैज्ञानिक तरीके से उत्&#x200d;तर देने से देश में बड़ा मैसेज जायेगा। उन्&#x200d;होंने अपनी प्रस्&#x200d;तुति में इस पर बड़ा व्&#x200d;याख्&#x200d;यान दिया। उन्&#x200d;होंने कहा कि जैसे लम्&#x200d;बे समय से हम लोग कैल्&#x200d;करिया फॉस का उपयोग करते आ रहे हैं, यह दवा इतनी प्रसिद्ध हो गयी है कि ज्&#x200d;यादातर घरों में मिल जाती है, यही नहीं दूसरी पैथी के लोगों को भी इसे दांत निकलने में सहायक दवा के रूप में जानकारी है। लेकिन अब जरूरत इस बात का बताने की है कि कैल्&#x200d;करिया फॉस किस तरह काम करती है। उन्&#x200d;होंने कहा कि बच्&#x200d;चों के लिए कैल्&#x200d;करिया फॉस कैल्शियम की पूर्ति करती है, उन्&#x200d;होंने विस्&#x200d;तार से बताया कि कैल्&#x200d;करिया फॉस बच्&#x200d;चे की जनरल हेल्&#x200d;थ में कितनी सहायक है। बच्&#x200d;चे के एनिमिक होने, मिट्टी खाने की आदत होने, जल्&#x200d;दी-जल्&#x200d;दी सर्दी, रेस्&#x200d;पेरेटरी प्रॉब्&#x200d;लम होने जैसी दिक्&#x200d;कतों के उपचार में कैल्&#x200d;करिया फॉस की बड़ी भूमिका है।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>बच्&#x200d;चों का बचपन बचाना बहुत जरूरी</strong></span></h6>
<p>अभिभावक जैसी भूमिका में आ चुके चिकित्&#x200d;सक व शिक्षक प्रो बीएन सिंह ने कहा कि बच्&#x200d;चों का बचपन बचाना बहुत जरूरी है। होम्&#x200d;योपैथी में बच्&#x200d;चों का बहुत अच्&#x200d;छा इलाज मौजूद है, इस इलाज का लाभ सभी बच्&#x200d;चों तक पहुंचे इसके लिए इसका प्रचार-प्रसार और इसके प्रति लोगों का विश्&#x200d;वास जगाना बहुत जरूरी है। उन्&#x200d;होंने इसमें मीडिया के सहयोग का आह्वान करते हुए मुख्&#x200d;य अतिथि सूचना आयुक्&#x200d;त सुभाष चन्&#x200d;द्र से कहा कि किसी भी उपयोगी मुहीम को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका सिर्फ महत्&#x200d;वपूर्ण ही नहीं बल्कि अपरिहार्य है। उन्&#x200d;होंने डॉ अनुरुद्ध वर्मा की बात का समर्थन करते हुए कहा कि बच्&#x200d;चों को मिट्टी में खेलना और शारीरिक दमखम वाले खेलों को खेलना बहुत जरूरी है, लेकिन बच्&#x200d;चों को आज एयरकंडीशन्&#x200d;ड चिल्ड्रेन बना दिया है, वह बिस्&#x200d;तर से सीधे उठकर कार में बैठता है। उन्&#x200d;होंने कहा कि जरूरी यह है कि बच्&#x200d;चा बिल्&#x200d;कुल मस्&#x200d;त होकर खेले-कूदे, भागदौड़ करे, योगाभ्&#x200d;यास करे, मौसमी फल, सब्जियां खाये तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, जाहिर है जब रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी तो आयेदिन होने वाली बीमारियों से भी छुटकारा मिलेगा। ऐसा बच्&#x200d;चा ही आगे चलकर अच्&#x200d;छा नागरिक बनेगा।</p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="aligncenter size-full wp-image-14048" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-2.png" alt="" width="883" height="658" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-2.png 883w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-2-300x224.png 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/homeo-2-768x572.png 768w" sizes="(max-width: 883px) 100vw, 883px" /></p>
<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि मैं किसी पैथी की बुराई के नजरिये से नहीं कह रहा हूं, लेकिन देखा यह जाता है कि बच्&#x200d;चे को थोड़ा सा भी खांसी-जुकाम हो गया तो उसे एंटी एलर्जिक, एंटी बायटिक दवायें दे दी जाती हैं, फौरी तौर पर तो उसे फायदा हो जाता है लेकिन इसके साइड इफेक्&#x200d;ट नुकसानदायक हैं। उन्&#x200d;होंने आह्वान किया कि देश के भविष्&#x200d;य बच्&#x200d;चों को स्&#x200d;वस्&#x200d;थ बनाये रखें। डॉ बीएन सिंह ने आये हुए प्रतिभागियों से कॉन्&#x200d;फ्रेंस में भाग लेने पर खुशी जताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन होने चाहिये, उन्&#x200d;होंने बताया कि मलेशिया में भी इस तरह के आयोजन की योजना तैयार हो रही है, उसमें भी ज्&#x200d;यादा से ज्&#x200d;यादा चिकित्&#x200d;सक पहुंचे तो देश ही नहीं विदेशों में भी अच्&#x200d;छा मैसेज जायेगा।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>एडीएचडी से ग्रस्&#x200d;त बच्&#x200d;चों का होम्&#x200d;योपैथी में उपचार </strong></span></h6>
<p>हरियाणा से आए डॉ नवनीत निदानी ने बच्चों की व्यवहारगत समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आजकल बच्चों में हिंसा, झूठ बोलने की प्रवृत्ति, गुस्सा अधिक हो रहा है। होम्योपैथी के द्वारा बच्चे के व्यक्तिगत लक्षणों को ध्यान में रखकर व्यवहार गत समस्याओं को दूर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि ए डी एच डी से ग्रस्त बच्चों को भी होम्&#x200d;योपैथी द्वारा सामान्&#x200d;य बनाया जा सकता है।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>औषधियों के कीनोट लक्षणों के बारे में बताया</strong></span></h6>
<p>दिल्ली से आए डॉ आदित्य कौशिक ने बच्चों के रोगों के उपचार में प्रयुक्त होने वाली औषधियों के कीनोट लक्षणों के बारे में बताया, इन लक्षणों के आधार पर बच्चे को स्वस्थ किया जा सकता है। कानपुर में आये एलोपैथी से होम्&#x200d;योपैथी के डॉक्&#x200d;टर बने डॉ हर्ष निगम ने बताया कि बच्चों के सभी प्रकार के रोगों का सफल उपचार उपलब्ध है उन्होंने अनेक रोगों का उदाहरण दिया, साथ ही यह भी बताया कि बच्चों को होम्&#x200d;योपैथिक औषधियों से रोगों से बचाया भी जा सकता है।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>बाल मृत्&#x200d;यु दर को कम करना जरूरी</strong></span></h6>
<p>वीरांगना अवंती बाई महिला चिकित्सालय के वरिष्&#x200d;ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सलमान खान ने देश दुनिया में बच्चों की स्वास्थ्य की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाल मृत्यु दर को कम करना बहुत जरूरी है साथ ही बच्चों में कुपोषण को दूर करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। बच्चे को पौष्टिक आहार देना चाहिए साथ ही खेलकूद में भी शामिल करना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ बीबी सिंह नवाब, डॉ भक्&#x200d;त वत्&#x200d;सल, डॉ अतुल कुमार सिंह, डॉ अरविन्&#x200d;द वर्मा ने भी अपने विचार रखे।</p>
<p>कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। सभा का संचालन डॉक्टर बी के गुप्ता ने किया। कॉन्फ्रेंस में आए अतिथियों व प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ आशीष वर्मा ने कहा कि यहां आये सभी चिकित्&#x200d;सक विशेषकर प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों का विशेष आभार प्रकट करता हूं कि उन्होंने अपनी प्रैक्टिस को 1 दिन के लिए रोक कर यहां आने का समय निकाला।</p>
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