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	<title>रसोईघर &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>कहीं दूर क्‍यों जाना, जब रसोईघर में ही रखा है दवाओं का खजाना</title>
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		<pubDate>Thu, 23 Aug 2018 13:27:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="412" height="205" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/08/dr.-devesh-Srivastava.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/08/dr.-devesh-Srivastava.jpg 412w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/08/dr.-devesh-Srivastava-300x149.jpg 300w" sizes="(max-width: 412px) 100vw, 412px" />बरसात के मौसम में होने वाली अनेक बीमारियों को ठीक करने के नुस्‍खे बताये आयुर्वेद चिकित्‍सक ने लखनऊ। बरसात का मौसम यूं तो बहुत सुहाना लगता है लेकिन इसमें अनेक प्रकार के रोग होने का डर रहता है। सुदूर क्षेत्रों में अधिकतर लोग झोला छाप डाक्टर के यहाँ भी इलाज कराने चले जाते हैं। जबकि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="412" height="205" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/08/dr.-devesh-Srivastava.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/08/dr.-devesh-Srivastava.jpg 412w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/08/dr.-devesh-Srivastava-300x149.jpg 300w" sizes="(max-width: 412px) 100vw, 412px" /><p><span style="color: #0000ff;"><strong>बरसात के मौसम में होने वाली अनेक बीमारियों को ठीक करने के नुस्&#x200d;खे बताये आयुर्वेद चिकित्&#x200d;सक ने</strong></span></p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="wp-image-6338 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/08/dr.-devesh-Srivastava-300x149.jpg" alt="" width="366" height="182" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/08/dr.-devesh-Srivastava-300x149.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/08/dr.-devesh-Srivastava.jpg 412w" sizes="(max-width: 366px) 100vw, 366px" /></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> बरसात का मौसम यूं तो बहुत सुहाना लगता है लेकिन इसमें अनेक प्रकार के रोग होने का डर रहता है। सुदूर क्षेत्रों में अधिकतर लोग झोला छाप डाक्टर के यहाँ भी इलाज कराने चले जाते हैं। जबकि असलियत यह है कि हमारे रसोईघर के अंदर ही अनेक प्रकार के रोग को ठीक करने के आयुर्वेदिक मसाले रखे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह बात आयुष विभाग के वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ देवेश कुमार श्रीवास्तव ने कहते हुए बताया कि आयुर्वेद ही एक सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है जो पूरे विश्व स्वस्थ्य बनाये रखने के साथ साथ शरीर के सभी रोगों को जड़ से समाप्त करती है।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>ऋतुओं से जुड़ा है हमारा स्वास्थ्&#x200d;य व लम्बा जीवन</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आयुर्वेद एक हमारी प्राचीन चिकित्सा पद्धति है आयुर्वेद जीवन का विज्ञान है स्वस्थ बने रहने के लिए किस मौसम में किस समय आयुर्वेद में प्रातः से शुरू होकर रात सोने तक वर्णित है कि  हमारे देश मे तीन ऋतुएं होती हैं अब इस समय वर्षा ऋतु में मौसम परिवर्तन के साथ-साथ मौसम के अनुकूल उचित आहार-विहार, नियम-संयम करेंगे तो हमारे शरीर मे कोई भी मौसमी बीमारियां नही आएँगी वर्षा ऋतु में स्निग्ध आहार का सेवन करना चाहिये छह रस ( तिक्त, कषाय,कटु,अम्ल, लवण,मधुर ) होते होते है जिन ऋतुओं में जिन रसों का सेवन लिखा है उस ऋतु में उन रसों के सेवन की मात्रा अगर हम बढ़ा देंगे तो हमारे शरीर स्वस्थ बना रहेगा रोगप्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी और कोई भी दोष हमारे शरीर पर आक्रमण करके हमारे शरीर को रोगग्रस्त नहीं कर सकता है ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>&#8220;</strong></span><strong><span style="color: #0000ff;">वर्षा ऋतु में हमारा आहार-विहार&#8221;</span> </strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वर्षा ऋतु में मनुष्य का शारिरिक बल कमजोर हो जाता है जिसके कारण पाचक अग्नि कमजोर हो जाती है और वर्षा काल मे वातादि दोष भी प्रकुपित हो जाता है जिसके कारण अपच, गैस, उदार विकार उत्पन्न होने की संभावनाओं के कारण आहार-विहार के नियम संयम का पालन करना बहुत ही जरूरी हो जाता है इसके लिए श्रम एवं वातादि बढ़ाने वाले आहार विहार का सेवन न करके स्नेहयुक्त आहार, सुपाच्य, हल्के या ऐसे पदार्थ का सेवन करें जो कि पाचन शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव न डालें शरीर मे अपच और कब्ज कारक पदार्थ का सेवन नही करना चाहिये इस ऋतु में पुराने जौ,गेहूं एवं चावल का सेवन करना चाहिए क्योंकि पुराने अन्न से जठराग्नि की रक्षा होती है।</p>
<p>वर्षा ऋतु में मूंग की दाल का सेवन नियमित रूप से करना चाहिये हरी पत्तीदार सब्जी का सेवन नहीं करना चाहिए और भोजन को शांतमन से 32 बार चबा चबा कर खाना चाहिए पुराना शहद,सोंठ और सेंधा नमक का सेवन भी वर्षा काल मे बहुत लाभप्रद है  सावन में हरीतकी चूर्ण का सेवन सेंधा नमक के साथ प्रातः उठते ही सादे पानी से लेना चाहिये, तुलसी की चाय और नीबू का सेवन भी नियमित करने से रोगप्रतिरोधक क्षमता अच्छी रहती है।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जल की शुद्धता पर विशेष ध्यान रखना चाहिए</strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जिसके पास आरओ नही है गांव में लोग बाल्टी के पानी मे फिटकरी को ऊपरी सतह पर किनारे से गोल घुमाते हुए बीच में लाकर निकाल कर साफ जग रख ले इतना करने से एक घंटे में पानी की सारी गंदगी नीचे बैठ जाएगी स्&#x200d;वच्&#x200d;छ निर्मल जल पीने के लिए ले सकते हैं। पानी को उबाल कर भी प्रयोग में ले सकते हैं इस ऋतु में त्वचा रोग भी होने का खतरा रहता है इसके लिए नीम के जल से स्नान के शरीर को ठीक से सूखा कर तब पूरे वस्त्र पहन कर निकलना चाहिए कीचड़ के पैर तुरंत आकर साफ करना चाहिए। एक क्रीम सब लोग बना कर रखा सकते है इससे त्वचा सम्बधी रोग होने की संभावनाएं कम होंगी 50 ग्राम नारियल तेल 50 ग्राम मोम, एक चम्मच हल्दी पकाकर बाद में एक टुकड़ा कपूर डाल कर डिब्बी में रख कर रोज सुबह-शाम लगाएं।</p>
<p>वर्षा ऋतु में वातदोष पित्त और कफ के साथ मिलकर ज्वर बुख़ार उत्पन्न करते है अतः इससे बचने के लिए सभी लोग हफ्ते में दो दिन का उपवास करें तो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे लिवर सम्&#x200d;बन्&#x200d;धी बरसाती रोग पास भी नही फटकेंगे।</p>
<p>वर्षा ऋतु में मुख्य रूप से आंत्रशोथ, डायरिया,  पेचिस,  अपच,  पीलिया, चर्मरोग होने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं आंत्रशोथ में गंदगी  खुली चाट पकौड़ी,गंदा पानी, बर्तनों की गंदगी, खुला बासी भोजन, माता के स्तन की सफाई, गंदी फल सब्जियां बिना धोए खाना, रोड साइड खुली चीजे खाना आदि आंत्रशोथ के कारण हैं।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>उपचार</strong></span>:- तत्काल उबला पानी मे नीबू, नमक, चीनी का घोल दें, चिकित्सक के पास जाएं</p>
<p>डायरिया,पेचिस में बेल सौंफ एसबी गोलभूसी को तत्काल सादे पानी से पिलाये और नीबू, नमक चीनी का घोल थोड़ी थोड़ी देर में देते रहें दोनों तुरंत में तुरन्त राहत मिल जाएगी।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>पीलिया </strong></span>:- अक्सर दूषित जल पीने से उदर विकार व रक्तविकृति के कारण पीलिया रोग होता है इसमे अचानक भूख खत्म हो जाती है जी मिचलाता है,उल्टियां होने लगती है पेट के दाएं तरफ ऊपर दर्द होता है,  मूत्र आंख त्वचा का रंग पीला होने लगता है</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>उपचार</strong></span>:-आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करें, तब तक पीपल का पता, करेले का पत्ता, गिलोय को पीस कर रस पियें।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>मलेरिया</strong></span>:- वर्षा ऋतु में जगह जन जागरूकता की कमी से जगह गड्रढे,  जिसमे पानी,खरपतवार झाड़ी झंकार की वजह से पानी मच्छरों की पैदावार से इनके काटने से मलेरिया रोग होता है</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>बचाव</strong></span>:-ग्राम प्रधान व सरकार गढ्ढा भरवाए</p>
<p><span style="color: #0000ff;">उपचार</span>:-आयुर्वेदिक चिकित्सक से मिलें तबतक करेले के तीन पत्ते में 3 काली मिर्च पीस कर पिये</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वर्षाऋतु में बच्चों की विशेष देखभाल की जरूरत पड़ती है उनको उल्टी, दस्त,  बुखार, खुजली आदि होने की संभावना ज्यादा होती है इससे बचने के लिए साफ सफाई की अच्छी व्यवस्था रखनी चहिये दूध ताजा ढंका होना चाहिए बच्चों को दलिया में सभी सब्जियां, टमाटर मिक्स करके खिचड़ी बना कर देना चाहिए जिससे सारे विटामिन मिनरल्स मिल जायें बड़े लोग भी ले सकते हैं।  आयुर्वेद ही एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिससे अस्वस्थ व्यक्ति को स्वस्थ व स्वस्थ को पूर्ण रूप से स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।</p>
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