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	<title>मनोरोगी &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>बच्‍चों के ‘व्‍यवहार’ को इग्‍नोर न करें, वयस्‍क होने पर बन सकता है मनोरोगी</title>
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		<pubDate>Tue, 30 May 2023 11:34:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="353" height="392" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-1.jpg 353w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-1-270x300.jpg 270w" sizes="(max-width: 353px) 100vw, 353px" />-मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर गोल्‍डन फ्यूचर ने आयोजित की संगोष्‍ठी -रामकृष्‍ण मिशन की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित हुआ कार्यक्रम  सेहत टाइम्‍स लखनऊ। वयस्‍कों को होने वाले अनेक मनोरोगों की नींव बचपन में ही पड़ती है, ऐसे में अपने बच्‍चों को मनोरोगी होने से बचाने के लिए बच्‍चों की परेशानियों को बचपन में ही समझें और उसका &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="353" height="392" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-1.jpg 353w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-1-270x300.jpg 270w" sizes="(max-width: 353px) 100vw, 353px" /><h2><span style="color: #ff0000;"><strong>-मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य पर गोल्&#x200d;डन फ्यूचर ने आयोजित की संगोष्&#x200d;ठी</strong></span></h2>
<h2><span style="color: #ff0000;"><strong>-रामकृष्&#x200d;ण मिशन की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित हुआ कार्यक्रम</strong></span></h2>
<p><strong><img decoding="async" loading="lazy" class="size-medium wp-image-42110 alignleft" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-1-270x300.jpg" alt="" width="270" height="300" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-1-270x300.jpg 270w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-1.jpg 353w" sizes="(max-width: 270px) 100vw, 270px" /> </strong><strong>सेहत टाइम्&#x200d;स </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> वयस्&#x200d;कों को होने वाले अनेक मनोरोगों की नींव बचपन में ही पड़ती है, ऐसे में अपने बच्&#x200d;चों को मनोरोगी होने से बचाने के लिए बच्&#x200d;चों की परेशानियों को बचपन में ही समझें और उसका हल निकालें। यह समझना कि बच्&#x200d;चों को किस बात का टेंशन, यह गलत है, बच्&#x200d;चों को भी टेंशन होता है।</p>
<p>यह सलाह गौरांग क्&#x200d;लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्&#x200d;योपैथिक रिसर्च के कन्&#x200d;सल्&#x200d;टेंट (एमडी साइक्रियाट्री होम्&#x200d;योपैथी) डॉ गौरांग गुप्&#x200d;ता ने रविवार को रामकृष्&#x200d;ण मठ में आयोजित संगोष्&#x200d;ठी में कही। रामकृष्&#x200d;ण मिशन की 125वीं वर्षगांठ पर मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य पर कार्य करने वाली संस्&#x200d;था गोल्&#x200d;डेन फ्यूचर ने ‘अच्&#x200d;छे मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य को लेकर रिश्&#x200d;तों के विभिन्&#x200d;न पहलुओं पर विशेषज्ञों की क्&#x200d;या राय है’ विषय पर संगोष्&#x200d;ठी का आयो&#x200d;जन किया था।</p>
<p>संगोष्&#x200d;ठी में अपने विचार रखते हुए डॉ गौरांग गुप्&#x200d;ता ने कहा कि भारत में पिछले सौ-डेढ़ सौ वर्षों में अनेक क्रांतियां हुई हैं, मौजूदा समय में मा&#x200d;नसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य को लेकर एक क्रांति आयी हुई है। उन्&#x200d;होंने कहा कि आज से 20-30 साल पूर्व लोग अवसाद, चिंता जैसी मानसिक दिक्&#x200d;क्&#x200d;तों से ग्रस्&#x200d;त होने पर इस विषय पर बात करने से कतराते थे, लेकिन आज स्थितियां भिन्&#x200d;न हैं, आज लोग खुलकर यह स्&#x200d;वीकार करते हैं कि कभी वह इसके शिकार थे, बॉलीवुड कलाकार तक जो पहले इन बातों को छिपाते थे, अब खुलकर बताते हैं कि वह इस समस्&#x200d;या से जूझ चुके हैं। उस समय प्रोड्यूसर ऐसे कलाकार को फि&#x200d;ल्&#x200d;म में नहीं लेता था, उसे लगता था कि अगर मैंने इसे फि&#x200d;ल्&#x200d;म में लिया और मानसिक समस्&#x200d;या के चलते ये कार्य नहीं कर पाये, तो पैसा डूब जायेगा।</p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class=" wp-image-42111 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-2-300x168.jpg" alt="" width="462" height="259" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-2-300x168.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2023/05/Dr.Gaurang-2.jpg 669w" sizes="(max-width: 462px) 100vw, 462px" /></p>
<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि इसी क्रांति में मैं अपनी बात जोड़ते हुए कहना बताना चाहता हूं कि मैंने अपनी प्रैक्टिस में देखा है कि 5 से 20 वर्ष की उम्र के बच्&#x200d;चों/किशोरों की समस्&#x200d;याओं को लेकर माता-पिता अनभिज्ञ हैं, उन्&#x200d;हें यह पता ही नहीं है कि इस उम्र में उनके बच्&#x200d;चों को किसी प्रकार की मानसिक समस्&#x200d;या हो सकती है, उन्&#x200d;हें लगता है कि इन्&#x200d;हें आखिर कौन सा तनाव है, इन्&#x200d;हें खाना, पढ़ना, सोना ही तो है, उन्&#x200d;होंने कहा कि लेकिन माता-पिता की यह सोच बिल्&#x200d;कुल गलत है।</p>
<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि जिन बच्&#x200d;चों को यह शिकायत होती है तो वह रोते नहीं है, बल्कि उसके अंदर जो लक्षण दिखते हैं वे हैं चिड़चिड़ापन, गुस्&#x200d;सा, दुर्व्&#x200d;यवहार आदि। जबकि माता-पिता बच्&#x200d;चों के इन लक्षणों को यंग जनरेशन का व्&#x200d;यवहार समझ कर टाल देते हैं, वे इसकी जड़ में नहीं जाते हैं। डॉ गौरांग ने कहा कि मैंने अपनी क्&#x200d;लीनिकल प्रैक्टिस में यह महसूस किया है कि करीब 10 में से 6 यानी आधे से ज्&#x200d;यादा मामलों में गलती बच्&#x200d;चों की नहीं, बल्कि माता-पिता की होती है, उन्&#x200d;होंने कहा कि गलती से आशय इस बात का है कि माता-पिता बच्&#x200d;चे की परेशानियों को इग्&#x200d;नोर करते हैं। दरअसल माता-पिता नौकरी, भागदौड़, गृहस्&#x200d;थी में इतने उलझे रहते हैं कि वे बच्&#x200d;चों की इन परेशानियों को महसूस नहीं कर पाते हैं। उन्&#x200d;होंने कहा कि जबकि बच्&#x200d;चों की परेशानी की वजहों में जायें तो स्&#x200d;कूल में कोई बच्&#x200d;चा उन्&#x200d;हें परेशान करता है, कमेंट करता है, उसकी खिंचाई करता है, यहां तक कि उसे अपशब्&#x200d;द तक कहता है या बच्&#x200d;चे को पढ़ाई का टेंशन है आदि-आदि।</p>
<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि मैं एक उदाहरण बताता हूं कि दो माह पूर्व एक सात साल के बच्&#x200d;चे को उसके माता-पिता सफेद दाग की शिकायत लेकर आये। डॉ गौरांग ने बताया कि मैंने उनके माता-पिता से कहा कि सफेद दाग किसी न किसी चिंता, तनाव के कारण होता है, तो उन्&#x200d;होंने अविश्&#x200d;वास भरे लहजे में कहा कि इसे तीन साल पहले चार वर्ष की उम्र से यह शिकायत शुरू हुई है, इसे कौन का तनाव हो सकता है।</p>
<p>डॉ गौरांग ने बताया कि मैंने बच्&#x200d;चे के माता-पिता को डर, कोई घटना, किसी सदस्&#x200d;य से बिछड़ना जैसे तनाव के कई कारणों के बारे में बताया। इसके बाद जब हिस्&#x200d;ट्री लेना शुरू किया तो पता चला कि जब बच्&#x200d;चे की उम्र चार वर्ष थी, तब उसकी मां गर्भवती थीं, उस समय परिस्थितियोंवश डिलीवरी के लिए उसकी मां छह माह तक अपने मायके में रही, यही नहीं दो-तीन माह बाद पिता भी पत्&#x200d;नी के साथ अपनी ससुराल में रहे, जबकि यह बच्&#x200d;चा बाबा-दादी के पास रहा, उन दिनों वह दिनभर रोता रहता था, दुखी रहता था। यहां यह कारण सामने आया कि माता-पिता से अचानक हुई दूरी से बच्&#x200d;चे को इतना मानसिक तनाव हुआ कि उसे सफेद दाग की शिकायत हो गयी।</p>
<p>इससे पूर्व गोल्&#x200d;डेन फ्यूचर के संस्&#x200d;थापक शोभित नारायण अग्रवाल ने मंच का संचालन दायित्&#x200d;व निभाते हुए आये हुए अतिथियों का स्&#x200d;वागत किया। उन्&#x200d;होंने कहा कि मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य एक गंभीर मुद्दा है, इसे समझें और समस्&#x200d;याओं का समाधान करें। शोभित ने आये हुए अतिथियों और स्&#x200d;पीकर्स का परिचय देते हुए संगोष्&#x200d;ठी के विषय पर प्रकाश डाला। उन्&#x200d;होंने गोल्&#x200d;डेर फ्यूचर की कार्यप्रणाली के बारे में भी जानकारी दी।</p>
<p>नूरमंजिल साइक्रियाटिक सेंटर की क्&#x200d;लीनिकल साइकोलॉजिस्&#x200d;ट डॉ अंजली गु्प्&#x200d;ता ने कार्यक्रम में पति-पत्&#x200d;नी के बीच होने वाले तनाव के कारणों और तनाव की समाप्ति के लिए किये जाने वाले प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जबकि हीलर, सोशल एक्टिविस्&#x200d;ट डॉ सीमा यादव ने बेटियों और माता-पिता के बीच किस प्रकार के सम्&#x200d;बन्&#x200d;ध रहने चाहिये, इस पर प्रकाश डाला। गौरव प्रकाश ने कोविड की वजह से आयी परिवार में परे&#x200d;शानियों का समाधान करने के बारे में अपने सुझाव दिये। उन्&#x200d;होंने मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य की गंभीरता के विषय में बात करते हुए बताया कि अवसाद से ग्रस्&#x200d;त देशों में भारत का दूसरा स्&#x200d;थान है। उन्&#x200d;होंने कहा कि जनसंख्&#x200d;या और मनोचिकित्&#x200d;सक के अनुपात हमारे देश में बहुत ज्&#x200d;यादा है यानी मनोचिकित्&#x200d;सकों की बहुत कमी है।</p>
<p>रामकृष्&#x200d;ण मठ के अध्&#x200d;यक्ष तथा विेवेकानंद पॉलीक्&#x200d;लीनिक के संचालक स्&#x200d;वामी मुक्तिनाथानंद ने रामकृष्&#x200d;ण मिशन की 125वीं वर्षगांठ पर आयोजित इस कार्यक्रम में रामकृष्&#x200d;ठ मठ के इतिहास के बारे में बताया। इस मौके पर एक पैनल डिस्&#x200d;कशन भी हुआ जिसमें लखनऊ विश्&#x200d;वविद्यालय की डॉ अर्चना शुक्&#x200d;ला, सिटी मॉन्&#x200d;टेसरी स्&#x200d;कूल की डॉ कल्&#x200d;पना त्रिपाठी, पति-पत्&#x200d;नी कल्&#x200d;याण समिति के  डॉ योगेन्&#x200d;द्र प्रताप सिंह और आर्ट ऑफ लिविंग के अध्&#x200d;यापक समर्थ नारायण ने हिस्&#x200d;सा लिया।</p>
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