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	<title>पाया &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>पांच दशकों बाद मिली है टीबी की दवा, इसे खाने में लापरवाही की तो बचाने की कोई दवा नहीं</title>
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		<pubDate>Wed, 10 Oct 2018 16:24:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="512" height="341" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1.jpg 512w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" />केजीएमयू में आयोजित समारोह में उत्‍तर प्रदेश के पहले मरीज को चिकित्‍सा शिक्षा राज्‍य मंत्री ने दवा खिलाकर की अभियान की शुरुआत   लखनऊ 10 अक्‍टूबर। टीबी का इलाज बीच में ही छोड़ने की गलती करने वाले मरीजों के लिए जीवन की अनमोल सौगात का शुभारम्‍भ उत्‍तर प्रदेश में आज से हो गया। मल्‍टी ड्रग &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="512" height="341" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1.jpg 512w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" /><p><span style="color: #0000ff;"><strong>केजीएमयू में आयोजित समारोह में उत्&#x200d;तर प्रदेश के पहले मरीज को चिकित्&#x200d;सा शिक्षा राज्&#x200d;य मंत्री ने दवा खिलाकर की अभियान की शुरुआत</strong></span></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong> <img decoding="async" loading="lazy" class="size-medium wp-image-7201 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1-300x200.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1.jpg 512w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ </strong>10 अक्&#x200d;टूबर। टीबी का इलाज बीच में ही छोड़ने की गलती करने वाले मरीजों के लिए जीवन की अनमोल सौगात का शुभारम्&#x200d;भ उत्&#x200d;तर प्रदेश में आज से हो गया। मल्&#x200d;टी ड्रग रेसिस्&#x200d;टेंट (एमडीआर) मरीजों के लिए यह दवा बड़ी सौगात इसलिए है क्&#x200d;योंकि लगभग पांच दशकों बाद टीबी की कोई दवा खोजी गयी है। लेकिन एक बार फि&#x200d;र एक चुनौती भी है कि इस दवा को नियमित रूप से छह माह खाना है, और अगर इसमें लापरवाही हुई तो फि&#x200d;लहाल दूसरी कोई दवा अभी नहीं है। इस लिए प्रधानमंत्री नरेन्&#x200d;द्र मोदी के वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्&#x200d;त बनाने की दिशा में यह दवा खास भूमिका निभाने वाली है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>2012 में तैयार दवा को विश्&#x200d;व स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य संगठन ने ट्रायल के बाद दी मंजूरी </strong></span></p>
<p>टीबी के एमडीआर मरीजों के उपचार के लिए 2012 में खोजी गयी बिडाकुलीन BEDAQUILLINE नाम की दवा विश्&#x200d;व स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य संगठन के ट्रायल में खरी उतरने के बाद अब मरीजों को दी जानी शुरू कर दी गयी है। उत्&#x200d;तर प्रदेश में मरीज को यह पहली बार दी गयी और इसका गवाह बना किंग जॉर्ज चिकित्&#x200d;सा विश्&#x200d;व विद्यालय (केजीएमयू) का ब्राउन हॉल। यहां आयोजित एक समारोह में चिकित्&#x200d;सा शिक्षा राज्&#x200d;य मंत्री डॉ महेन्&#x200d;द्र सिंह ने सीतापुर जनपद के एक मरीज को खिलायी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>पीएचडी मंत्री ने चिकित्&#x200d;सक की तरह किया विश्&#x200d;लेषण </strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पीएचडी किये हुए डॉक्&#x200d;टर महेन्&#x200d;द्र सिंह ने आज जिस अंदाज में इस दवा को लेकर टीबी रोग का जो विश्&#x200d;लेषण किया, वह काबिले तारीफ था। बिना लिखित भाषण पढ़े डॉ महेन्&#x200d;द्र के टीबी पर दिये भाषण में उन्&#x200d;होंने जिस प्रकार बारीकियां और आंकड़े प्रस्&#x200d;तुत किये उसके कायल केजीएमयू के कुलपति डॉ एमएलबी भट्ट भी हो गये, इसका जिक्र उन्&#x200d;होंने बाद में दिये अपने भाषण में भी किया। डॉ सिंह ने कहा कि आईएएस-आईपीएस से ज्&#x200d;यादा मेहनत डॉक्&#x200d;टर बनने में हैं, क्&#x200d;योंकि आईएएस-आईपीएस में चयन होने के लिए साल-दो साल की मेहनत काफी होती है लेकिन डॉक्&#x200d;टरी पढ़ने के लिए 12 साल कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। यही नहीं जिन्&#x200d;दगी भर नयी-नयी जानकारियों के लिए पढ़ते ही रहना पड़ता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>एलोपैथी हो या होम्&#x200d;योपैथी जरूरी है सिम्&#x200d;पैथी</strong></span></p>
<p>उन्&#x200d;होंने मरीज के इलाज के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि मरीज को ठीक होने के लिए एलोपैथी हो या होम्&#x200d;योपैथी लेकिन दवाओं के साथ जरूरत होती है सिम्&#x200d;पैथी की। उन्&#x200d;होंने कहा कि अब आवश्&#x200d;यक यह है कि टीबी के जो मरीज ठीक हो गये हों उन्&#x200d;हें एक समारोह में बुलाकर नये मरीजों से मिलवाने की जरूरत है क्&#x200d;योंकि जब वह ठीक हुए मरीजों को देखेंगे तो उनका इलाज के प्रति विश्&#x200d;वास और बढ़ेगा।</p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="size-medium wp-image-7202 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1-1-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1-1-300x200.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/10/tb-1-1.jpg 512w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>डॉ महेन्&#x200d;द्र ने चिंता जताते हुए कहा कि मैं देख रहा हूं कि एक तरफ टीबी के मरीजों की संख्&#x200d;या में इजाफा हो रहा है और दूसरी ओर यह भी दावा किया जाता है कि टीबी रोग ठीक हो जाता है। तो आखिर रोगी बढ़ क्&#x200d;यों रहे हैं और एमडीआर वाले रोगी मर हैं इसका अर्थ यह है कि कहीं न कहीं उपचार के प्रति गम्&#x200d;भीरता नहीं बरती जा रही है। उन्&#x200d;होंने कहा कि आज भी ग्रामीण इलाकों में अस्&#x200d;पताल हैं, स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य केंद्र हैं और वहां टीबी की दवा भी उपलब्&#x200d;ध है लेकिन वहां पहुंचने के बजाय मरीज निजी डॉक्&#x200d;टरों पर ज्&#x200d;यादा विश्&#x200d;वास दिखाते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>सु&#x200d;बह जल्&#x200d;दी उठने के लिए रोचक कारण बताते हुए किया प्रेरित</strong></span></p>
<p>डॉ महेंन्&#x200d;द्र सिंह ने स्&#x200d;वस्&#x200d;थ जीवन शैली अपनाने के लिए एक बहुत अच्&#x200d;छा उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान जब सामने आ जायें तो कम से कम व्&#x200d;यक्ति को उठकर खड़ा हो जाना चाहिये लेकिन बहुत से लोग हैं जो नहीं करते हैं। इसे और खुलकर बताते हुए उन्&#x200d;होंने कहा कि भगवान सूर्य के सुबह उगने से पूर्व लोगों को जाग जाना चाहिये और उनकी अगवानी करनी चाहिये। ऐसा करेंगे तो आधी से ज्&#x200d;यादा बीमारियां इससे ही दूर हो जायेंगी। उन्&#x200d;होंने कहा कि लोगों को चाहिये चार सहजन के पत्&#x200d;ते, चार मीठी नीम, लहसुन रोज खायें तो देखिये बीमारियां आपके पास फटकेंगी नहीं। उन्&#x200d;होंने बताया कि आयुष्&#x200d;मान भारत योजना में इसकी व्&#x200d;य&#x200d;वस्&#x200d;था है कि ठीक होने के बाद अपनी दिनचर्या कैसी रखें जिससे स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य लाभ हो।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>पीएचडी वाले मंत्री ने किया चिकित्&#x200d;सक की तरह विश्&#x200d;लेषण </strong></span></p>
<p>कुलपति प्रो भट्ट ने अपने सम्&#x200d;बोधन में कहा कि चिकित्&#x200d;सा शिक्षा राज्&#x200d;यमंत्री डॉ महेंन्द्र सिंह पीएचडी वाले डॉक्&#x200d;टर जरूर हैं लेकिन उनका टीबी रोग के प्रति ज्ञान और आंकड़ों का वर्णन वाकई प्रेरणायोग्&#x200d;य है। यह उनके अपने कार्य के प्रति समर्पण भाव को दिखाता है कि वे जिस विभाग से जुड़े हैं उसकी तकनी&#x200d;की बातों का भी ज्ञान रखते हैं। उन्&#x200d;होंने कहा कि मेरी यह अपील है कि 1960 के दशक के बाद मिली इस दवा के सेवन के प्रति सतर्कता, सावधानी यानी नियमित सेवन बहुत जरूरी है क्&#x200d;योंकि अगर इस दवा से व्&#x200d;यक्ति रेसिस्&#x200d;ट हो गया तो इससे बेहतर दवा तो अभी मौजूद ही नहीं हैं यानी कि एमडीआर की एक और स्&#x200d;टेज तैयार हो जायेगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>मरीज के दवा खाने की मॉनीटरिंग जिला क्षय रोग अधिकारी के जिम्&#x200d;मे </strong></span></p>
<p>टीबी कंट्रोल की उत्&#x200d;तर प्रदेश की टास्&#x200d;क फोर्स के चेयरमैन और केजीएमयू की पल्&#x200d;मोनरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्&#x200d;यक्ष प्रो सूर्यकांत ने इस अवसर पर कहा कि नयी दवा BEDAQUILLINE के बारे में आपको बता दें कि इस दवा के डिब्&#x200d;बे में एक मरीज के हिसाब से दवायें हैं, इसमें 188 गोलियां हैं जो कि छह माह तक चलेंगी। उन्&#x200d;होंने बताया कि इस दवा को मरीज को नियमानुसार खाना है। मरीज दवा खाये इसके लिए जब यहां केजीएमयू में दवा दी जायेगी उस समय मरीज को 15 दिनों तक भर्ती करके दवा खिलायी जायेगी उसके बाद उस मरीज के जिले के जिला क्षय रोग अधिकारी को मरीज का पूरा विवरण इस आशय से भेजा जायेगा कि वे मरीज के नियत समय पर एमडीआर टीबी के खात्&#x200d;मे के लिए दी जाने वाली दवाओं का सेवन कराना सुनिश्चित करेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>पांच दशकों बाद मिली है दवा, इसका सेवन नियमित किया जाना जरूरी </strong></span></p>
<p>केजीएमयू से डॉक्&#x200d;टरी पढ़े विधायक डॉ हरेन्&#x200d;द्र सिंह भी इस मौके पर मौजूद रहे। उन्&#x200d;होंने अपने सम्&#x200d;बोधन में कहा कि पांच दशक के लम्&#x200d;बे अंतराल के बाद टीबी की दवा मिली है, एमडीआर वाले मरीजों में इसका उपयोग नियमित रूप से होना जरूरी है, इसे खाने वाले मरीज अपना कोर्स पूरा जरूर करें यह सुनिश्चित होना आवश्&#x200d;यक है। उन्&#x200d;होंने बताया कि यूएस पेटेंट इस दवा की अमेरिका में कीमत 20-25 लाख रुपये है जबकि यहां भारत में इसे सरकार 60 से 70 हजार रुपये में खरीद रही है लेकिन मरीज को यह बिल्&#x200d;कुल फ्री में उपलब्&#x200d;ध करायी जा रही हैं। इस मौके पर राज्&#x200d;य क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ संतोष गुप्&#x200d;ता, मुख्&#x200d;य चिकित्&#x200d;सा अधिकारी डॉ नरेन्&#x200d;द्र अग्रवाल, डीन मेडिसिन प्रो मधुम&#x200d;ती गोयल, केजीएमयू के मुख्&#x200d;य चिकित्&#x200d;सा अधीक्षक डॉ एसएन संखवार सहित अनेक फैकल्&#x200d;टी और विभागाध्&#x200d;यक्ष के साथ ही छात्र-छात्रायें भी उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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