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	<title>डॉ। सूर्यकांत &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<title>डॉ। सूर्यकांत &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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		<title>डांटना, फटकारना, पुचकारना, बस मकसद है टीबी को 2025 तक भारत से बाहर कराना</title>
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		<pubDate>Wed, 26 Dec 2018 18:35:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="1280" height="622" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1.jpg 1280w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1-300x146.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1-768x373.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1-1024x498.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />टीबी की नयी दवा बिडाक्विलिन की बीएचयू में लॉन्चिंग के अवसर पर बोले डॉ सूर्यकांत लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट टास्‍कफोर्स फॉर टीबी कंट्रोल के चेयरमैन व केजीएमयू के रेस्‍पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के हेड डॉ सूर्यकांत ने कहा है कि भारत सरकार ने टीबी यानी क्षयरोग को वर्ष 2025 तक बाहर करने के लिए व्‍यापक रणनीति &#8230;]]></description>
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<p style="color:#3400a3" class="has-text-color"><strong>टीबी की नयी दवा बिडाक्विलिन की बीएचयू में लॉन्चिंग के अवसर पर बोले डॉ सूर्यकांत</strong></p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" loading="lazy" width="1024" height="498" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1-1024x498.jpg" alt="" class="wp-image-8406" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1-1024x498.jpg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1-300x146.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1-768x373.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-1-1.jpg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश  स्टेट टास्&#x200d;कफोर्स  फॉर टीबी कंट्रोल के चेयरमैन व केजीएमयू के रेस्&#x200d;पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के हेड डॉ सूर्यकांत ने कहा है कि भारत सरकार ने टीबी यानी क्षयरोग को वर्ष 2025 तक बाहर करने के लिए व्&#x200d;यापक रणनीति तैयार की है, और इसी लक्ष्&#x200d;य को पाने के लिए ही केंद्र सरकार जहां डॉक्&#x200d;टरों, प्रोवाइडरों, दवा व्&#x200d;यापारियों आदि को टीबी के मरीज के नोटिफि&#x200d;केशन के समय धनराशि देकर पुचकार रही है वहीं लापरवाही बरतने पर 2 साल तक की सजा का प्रावधान रखकर डांट-फटकार भी रही है। </p>



<p>मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते समय डॉ सूर्यकांत ने यह बात बुधवार को वाराणसी में आईएमएस बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल टीबी की नई दवा बिडाक्विलिन को लॉन्&#x200d;च करते हुए कही। सूर्यकांत ने बताया कि टीबी भारत की बहुत बड़ी स्वास्थ्य समस्या है वर्तमान में 6000 लोग प्रतिदिन टीबी से ग्रसित हो जाते हैं और हर 1:30 मिनट में टीबी के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु हमारे देश में हो जाती है। </p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" loading="lazy" width="1024" height="498" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-2-1024x498.jpg" alt="" class="wp-image-8407" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-2-1024x498.jpg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-2-300x146.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-2-768x373.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/12/tb-2.jpg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ़
मेडिकल साइंसेस में टीबी एवं चेस्ट विभाग ने नई दवा बिडाक्विलिन की लॉन्चिंग का
आयोजन बुधवार को किया था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ सूर्यकांत ने बताया कि टीबी
को भारत में वैदिक काल में ऋग्वेद के जमाने से जाना जाता है। ऋग्वेद में बताया गया
है कि क्षयरोग से ग्रस्&#x200d;त मरीज को ताप रहता है,&nbsp;
कमजोर रहता है, कृषकाय हो जाता है, तथा इसके उपचार के लिए ऐसे रोगी को
शुद्ध वायु मिले, पोषण मिले, अच्&#x200d;छी सेवा-सुश्रुषा मिले। उन्होंने बताया कि टीबी
का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 24 मार्च 1882 &nbsp;को था, जब जर्मनी के डॉक्टर रॉबर्ट कोच ने टीबी
के बैक्टीरिया की खोज की। इसीलिए प्रतिवर्ष पूरी दुनिया में 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस
के रूप में मनाया जाता है टीबी के इतिहास में दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव 1944 माना जाता है जब टीबी की
पहली दवा स्&#x200d;टेप्&#x200d;टोमाइसिन का आविष्कार हुआ। </p>



<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि आधुनिक
विज्ञान ने भी जब टीबी का इलाज ढूंढ़ा तो रहने के स्&#x200d;थान को शुद्ध वातावरणयुक्&#x200d;त रखने
के लिए पहाड़ी जगहों को चुना। उन्&#x200d;होंने बताया कि विश्&#x200d;व का पहला सेनीटोरियम स्विटजरलैंड
में बना, इसी सेनीटोरियम में रहने के लिए तत्&#x200d;कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू
की पत्&#x200d;नी कमला नेहरू को टीबी होने के बाद रहने के लिए स्विटजरलैंड&nbsp; भेजा गया था। भारत की बात करें तो ये
सेनीटोरियम पहाड़ी स्&#x200d;थान भुवाली, पंचगनी, जयपुर आदि स्&#x200d;थानों पर बनाये गये हैं। &nbsp;</p>



<p>डॉ सूर्यकांत ने बताया कि
टीबी के इतिहास में तीसरा पड़ाव वर्ष 1993 माना जाता है, जब विश्व स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य
संगठन ने टीबी को ग्लोबल इमरजेंसी घोषित कर दिया इसी वर्ष भारत ने रिवाइज्ड नेशनल
ट्यूबरक्लोसिस कंट्रोल प्रोग्राम प्रारंभ किया इसके पश्चात विश्व में एक बड़ा पड़ाव
13 मार्च 2018 का आता है जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी ने एंड टीबी बाय 2025 &nbsp;घोषित किया जिसके अनुसार भारत में 2025 तक
टीबी को समाप्त करना है। ज्ञात हो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह लक्ष्य 2035 का रखा है अर्थात भारत के
प्रधानमंत्री ने टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य विश्व स्वास्थ संगठन के लक्ष्य से 10 वर्ष पूर्व निर्धारित किया
है। इस लक्ष्य को पाने के लिए भारत के सामने बहुत कठिन चुनौती है। </p>



<p>डॉ सूर्यकांत ने बताया कि
वर्तमान में टीबी समाप्ति के लिए भारत सरकार ने कुछ प्रमुख आयोजन प्रारंभ किए हैं
जिसमें से टीबी रोगियों के लिए निशुल्क जांच, निशुल्क उपचार तथा 500 रुपये प्रति माह का पोषण भत्ता शामिल है। इसके
अतिरिक्त भारत सरकार ने एक टीबी मरीज के नोटिफिकेशन तथा उसके ठीक होने तक प्रति टीबी
के मरीज के हिसाब से एक प्राइवेट डॉक्टर को 1000 का मानदेय भी शामिल है। इसी क्रम में 2012 &nbsp;के टीबी नोटिफिकेशन को और
मजबूत करते हुए नया नियम लागू किया गया है जिसके अनुसार तीन तरह के नोटिफिकेशन टीबी
के लिए जरूरी हैं। पहला जांच के समय, उपचार प्रारंभ करते समय तथा मेडिकल स्टोर
द्वारा टीबी का नोटिफिकेशन। </p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि अगर कोई
टीबी का नोटिफिकेशन नहीं करेगा तो उसको 2 वर्ष की सजा भी हो सकती है,
इसका उद्देश्य चिकित्सकों को डराना नहीं बल्कि टीबी के भारत में एक तिहाई रोगियों,
जिनका कोई अता-पता नहीं है, उनको रिकॉर्ड में लाना है। एक तिहाई रोगी अर्थात 1100000 टीबी के मरीज जिनका कोई
अता-पता नहीं है, और हो सकता है कि वह संक्रमित अवस्था में ही चल रहे हों। उनके
कारण टीबी अनियंत्रित हो सकती है क्योंकि एक टीबी के व्यक्ति का अगर उचित उपचार न
किया जाए तो वह अपने संक्रमण से एक &nbsp;साल में टीबी के 15 नए रोगी पैदा कर देता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए टीबी नोटिफिकेशन जारी किया गया है । </p>



<p>डॉ सूर्यकांत ने बताया एक
और समस्या हमारे देश में टीबी के बैक्टीरिया का बढ़ता हुआ रेजिस्टेंस है, जिसके
कारण मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी तथा एक्सपेंसिव टीबी अर्थात एमडीआर टीबी एवं एक्स
डी आर टीबी जैसी समस्याएं सामने आ रही है इन सब से निजात पाने के लिए बिडाक्विलिन नाम
की नई दवा विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा लाई गई है यह दवा मल्टी ड्रग रिसर्च टीबी
तथा एक्स्ट्रा टीबी के रोगियों के लिए रामबाण साबित हो सकती है। ज्ञात रहे कि इस
दवा की खोज वर्ष 2012 में की गई थी तथा विश्व स्वास्थ संगठन द्वारा परीक्षण के
पश्चात 2015 में भारत वर्ष में लाई गई। वर्ष 2016-17 में इसके और परीक्षण
भारतवर्ष में हुए और इस तरह इसको टीबी के कंट्रोल प्रोग्राम में शामिल किया गया। </p>



<p>उत्तर प्रदेश में लखनऊ आगरा मेरठ तथा गोरखपुर में पहले ही यह दवा प्रारंभ की जा चुकी है बुधवार को यह दवा बीएचयू के अस्पताल में प्रारंभ की गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ सूर्यकांत के अतिरिक्त अस्पताल के डायरेक्टर डॉ वीके शुक्ला, टीबी एवं चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ जेके मिश्रा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ जीएन श्रीवास्तव तथा वाराणसी के डिस्टि्रक्&#x200d;ट टीबी ऑफिसर डॉ राकेश कुमार सिंह, बीएचयू के मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ जया चक्रवर्ती तथा अन्य चिकित्सक, जूनियर डॉक्टर, एमबीबीएस के छात्र तथा डॉट्स में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित रहे कार्यक्रम की अध्यक्षता सर सुंदरलाल अस्पताल आईएमएस बीएचयू के डायरेक्टर डॉ वीके शुक्ला ने की, तथा धन्यवाद डॉ जेके मिश्रा ने दिया। इस अवसर पर चिकित्सकों द्वारा एमडीआर के एक  टीबी रोगी को दवा की पहली खुराक भी खिलाई गई। ज्ञात रहे कि बिडाक्विलिन दवा खिलाने से पहले रोगी का ईसीजी व अन्य परीक्षण किए जाते हैं, उसके पश्चात ही यह दवा प्रारंभ की जाती है।</p>
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