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	<title>डॉक्यूमेंट्री Archives - Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>दिल की बीमारियों से बचाने के लिए डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाकर लोगों के दिल तक पहुंचने की कोशिश</title>
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		<pubDate>Thu, 10 Sep 2026 15:58:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="448" height="336" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI-1-1.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI-1-1.jpeg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI-1-1-300x225.jpeg 300w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" /><p>-एसजीपीजीआई में आयोजित हुआ दिलचस्प सत्र &#8216;दिल से दिल की बात : एशियाई भारतीयों के दिल को समझना&#8217; सेहत टाइम्स लखनऊ। भारतीयों में कम उम्र में होने वाली दिल की बीमारियों का बढ़ता बोझ लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) में चर्चा का मुख्य विषय रहा, जब 8 सितंबर को ह्रदय &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="448" height="336" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI-1-1.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI-1-1.jpeg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI-1-1-300x225.jpeg 300w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" /><h2><span style="color: #ff0000;"><strong>-एसजीपीजीआई में आयोजित हुआ दिलचस्प सत्र &#8216;दिल से दिल की बात : एशियाई भारतीयों के दिल को समझना&#8217;</strong></span></h2>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-61069 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI.jpeg" alt="" width="1280" height="960" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI.jpeg 1280w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI-300x225.jpeg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI-1024x768.jpeg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/09/SGPGI-768x576.jpeg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>सेहत टाइम्स </strong><br />
<strong>लखनऊ।</strong> भारतीयों में कम उम्र में होने वाली दिल की बीमारियों का बढ़ता बोझ लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) में चर्चा का मुख्य विषय रहा, जब 8 सितंबर को ह्रदय रोग विशेषज्ञ, फिल्म निर्माता और एसजीपीजीआई का नेतृत्व एक दिलचस्प सत्र के लिए इकट्ठा हुए, जिसका शीर्षक था : दिल से दिल की बात: एशियाई भारतीयों के दिल को समझना।&#8221;</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>जॉर्जियन डॉ निर्मल व डॉ रेनू की फिल्म</strong></span></h3>
<p>इस सत्र में जाने-माने फिजिशियन-फिल्म निर्माता डॉ. निर्मल जोशी और डॉ. रेनू जोशी शामिल हुए। के जी एम.यू (KGMU) के पूर्व छात्र रहे ये डॉक्टर, अब अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में रहते हैं। उन्होंने अपनी प्रशंसित डॉक्यूमेंट्री &#8216;द ब्राउन हार्ट&#8217; को प्रदर्शित किया—यह एक दिलचस्प सफर है, जो यह पता लगाता है कि दक्षिण एशियाई लोगों में दिल के दौरे (हार्ट अटैक) कम उम्र में, ज़्यादा बार और अक्सर ज़्यादा गंभीर क्यों होते हैं।</p>
<p>व्यापक मेडिकल रिसर्च और 100 घंटे से ज़्यादा के इंटरव्यू पर आधारित यह फिल्म दर्शकों को भारत, यू के और अमेरिका की एक शानदार यात्रा पर ले जाती है, जिसमें प्रमुख एक्सपर्ट, शोधकर्ता और लोगों की ज़िंदगी से जुड़ी दिल को छू लेने वाली उनकी जिजीविषा और क्षति की कहानियाँ शामिल हैं।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>भारत में 27 प्रतिशत मौतों की वजह दिल की बीमारी</strong></span></h3>
<p>दिल की बीमारियाँ (कार्डियोवैस्कुलर बीमारी) दुनिया भर में मौत का सबसे बड़ा कारण बनी हुई हैं। 2022 में इनसे अनुमानित 1.98 करोड़ (19.8 मिलियन) मौतें हुईं—जो दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों का लगभग 32% है। भारत में भी दिल की बीमारियाँ मौत का सबसे बड़ा कारण हैं; WHO के अनुमान बताते हैं कि CVD (दिल की बीमारी) से लगभग 27% मौतें होती हैं, और इसका असर खास तौर पर अधेड़ उम्र के लोगों पर ज़्यादा पड़ता है।</p>
<p>इस पहल का स्वागत करते हुए, एसजीपीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आदित्य कपूर ने कहा कि भारतीय लोगों के दिल से जुड़ी बातचीत &#8220;ज़्यादा बार, ज़्यादा खुलकर और बहुत पहले&#8221; होनी चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि विज्ञान, असल ज़िंदगी के अनुभवों और कहानी कहने की कला को एक साथ लाने से दिल की बीमारियों से जुड़ी जटिल बातों को आसानी से समझा जा सकता है और उन पर अमल किया जा सकता है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>महिलाओं में नजरअंदाज होने वाली बीमारी</strong></span></h3>
<p>डॉ. रूपाली खन्ना, जो &#8216;द ब्राउन हार्ट&#8217; में भी शामिल रही हैं, ने महिलाओं में दिल की बीमारी के अक्सर नज़रअंदाज़ किए जाने वाले बोझ पर रोशनी डाली। उन्होंने लक्षणों को पहचानने, जोखिम के कारणों को समझने और गलतफहमियों को दूर करने के महत्व पर ज़ोर दिया, क्योंकि ये चीज़ें बीमारी का पता लगाने और इलाज में देरी का कारण बन सकती हैं।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>सेहत कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि रोज़ाना का चुनाव</strong></span></h3>
<p>संस्थान के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने कहा कि &#8220;सेहत कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि रोज़ाना का चुनाव है,&#8221; और इस बात पर ज़ोर दिया कि दिल की बीमारियों के बदलते हालात को देखते हुए जीवनशैली पर गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक जगह बैठे रहने की आदत, घंटों स्क्रीन के सामने बिताना, फास्ट फूड खाना, प्रोसेस्ड डाइट लेना, एक्सरसाइज़ न करना और बढ़ता तनाव आज की युवा पीढ़ी की ज़िंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा, &#8220;हमारा दिल हमारी आदतों का आईना है — आदत बदलो, दिल बदलो,&#8221; और युवाओं से एक्टिव और जागरूक जीवनशैली अपनाने की अपील की।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>जेनेटिक्स है तो भी बचना संभव</strong></span></h3>
<p>लगभग 45 मिनट के इस इंटरैक्टिव सेशन के दौरान, डॉ. जोशी ने &#8216;द ब्राउन हार्ट&#8217; (The Brown Heart) फिल्म के कुछ खास हिस्से दिखाए, जिनमें आनुवंशिक जोखिम, मेटाबोलिक रिस्क और जीवनशैली से जुड़े उन कारकों के बीच जटिल संबंध को दिखाया गया जिन्हें बदला जा सकता है। फिल्म का मुख्य संदेश सरल था: अपने आंकड़े जानें — जैसे ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज़, कोलेस्ट्रॉल, शरीर का वज़न और कमर का घेरा — और समय रहते कदम उठाएं।<br />
डॉ. जोशी ने एक अहम बात बताई: &#8221; जीन्स भले ही बंदूक में गोली भर दें, लेकिन जीवनशैली ही अक्सर ट्रिगर दबाती है।&#8221; &#8216;द ब्राउन हार्ट&#8217; इस गलतफहमी को चुनौती देती है, कि दिल की बीमारियों का भविष्य सिर्फ़ जेनेटिक्स ही तय करते हैं। हालांकि आनुवंशिक और पॉलीजेनिक कारक जोखिम में भूमिका निभाते हैं, लेकिन एक बड़ा हिस्सा (लगभग 80%) ऐसा है जिसे बदला जा सकता है — जैसे तंबाकू से दूर रहकर, शारीरिक रूप से एक्टिव रहकर, तनाव को मैनेज करके, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करके और स्वस्थ आदतें अपनाकर।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>छोटे-छोटे कदमों से बड़े बदलाव</strong></span></h3>
<p>चर्चा एक प्रभावशाली सच के साथ खत्म हुई — बीमारी से बचाव कोई दूर का सपना नहीं है; यह रोज़ाना का चुनाव है। &#8216;छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव लाते हैं, एक बार में एक आदत, एक बार में एक कदम।&#8217; स्वस्थ खान-पान की आदतें अपनाकर, एक्टिव रहकर, समझदारी से तनाव को मैनेज करके और एक्सरसाइज़ को परिवार की गतिविधि बनाकर हम एक बेहतर कल बना सकते हैं। याद रखें, &#8216;वेलनेस एक सफ़र है, कोई रेस नहीं&#8217; — और आज लिया गया हर जागरूक फ़ैसला एक स्वस्थ और खुशहाल भविष्य में निवेश है।</p>
<p>इस सेशन के बाद डॉ. निर्मल और रेनू जोशी, डॉ. कपूर, डॉ. तिवारी, डॉ. रूपाली खन्ना और कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. अंकित साहू के साथ सवाल-जवाब का एक लंबा सेशन हुआ, जिसमें शुरुआती लक्षणों, स्क्रीनिंग, जोखिम के कारणों और बचाव के बारे में सवालों के जवाब दिए गए।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>संदेश :</strong> </span>भारतीय दिल को किसी और चेतावनी की ज़रूरत नहीं है—उसे जीवनशैली में बदलाव की ज़रूरत है, और इसकी शुरुआत आज से ही होनी चाहिए।</p>
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