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	<title>खाली कुर्सी तकनीक &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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		<title>Research : ट्रांसजेंडर के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को मजबूत करने में &#8216;एम्‍प्‍टी चेयर टेक्‍नीक&#8217; कारगर</title>
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		<pubDate>Wed, 31 Aug 2022 09:51:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="448" height="269" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-1.jpg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-1-300x180.jpg 300w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" />‘इंडियन जर्नल ऑफ पॉजिटिव साइकोलॉजी’ में प्रकाशित हुई है यह स्‍टडी धर्मेन्‍द्र सक्‍सेना लखनऊ। शादी-विवाह और अन्‍य शुभ कार्यों में अचानक पहुंच कर ढोलक बजाकर, नाच-गाकर अपना नेग मांगने वाले हिजड़ों से आप बखूबी वाकिफ होंगे। पारम्‍परिक तौर पर दूसरों की खुशियों में शरीक होकर अपना और अपने जैसों का जीवनयापन करने वाले हिजड़ा समुदाय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="448" height="269" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-1.jpg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-1-300x180.jpg 300w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" />
<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>‘</strong><strong>इंडियन जर्नल ऑफ पॉजिटिव साइकोलॉजी</strong><strong>’ </strong><strong>में प्रकाशित हुई है यह स्&#x200d;टडी</strong><strong></strong></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-2-1024x614.jpg" alt="" class="wp-image-37132" width="512" height="307" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-2-1024x614.jpg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-2-300x180.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-2-768x461.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-2-1536x921.jpg 1536w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/08/Sawani-and-Ayushi-2-2048x1228.jpg 2048w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" /><figcaption><strong><em>सावनी गुप्&#x200d;ता व आयुषी गौर</em></strong></figcaption></figure></div>


<p></p>



<p><strong>धर्मेन्&#x200d;द्र सक्&#x200d;सेना</strong></p>



<p><strong>लखनऊ।</strong> शादी-विवाह और अन्&#x200d;य शुभ कार्यों में अचानक पहुंच कर ढोलक बजाकर, नाच-गाकर अपना नेग मांगने वाले हिजड़ों से आप बखूबी वाकिफ होंगे। पारम्&#x200d;परिक तौर पर दूसरों की खुशियों में शरीक होकर अपना और अपने जैसों का जीवनयापन करने वाले हिजड़ा समुदाय के लोगों को ट्रांसजेंडर भी कहा जाता है। यह तो हुई सामान्&#x200d;य सी बात जो लगभग सभी जानते हैं, लेकिन शायद यह बात सब नहीं जानते हैं कि इन ट्रांसजेंडर का अपना जीवन कितना कष्&#x200d;टप्रद है क्&#x200d;योंकि समाज में इनकी स्&#x200d;वीकार्यता दूसरों की तरह नहीं है, हालांकि अदालत के हस्&#x200d;तक्षेप के बाद से इनकी अलग पहचान दी गयी है, इनके अधिकारों को भी सुरक्षित बनाया गया है, लेकिन मेंटल ट्रॉमा के जिस दौर से ये गुजरते हैं &nbsp;जिन तथा उपे&#x200d;क्षाओं का इन्&#x200d;हें सामना करना पड़ता है, उसके लिए अभी बहुत कुछ किये जाने की आवश्&#x200d;यकता है।</p>



<p>इन ट्रांसजेंडर्स पर की गयी स्&#x200d;टडी में सामने आया है कि इनके मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य को मजबूत करने के लिए मनोविज्ञान की दुनिया में बहुत कुछ है, स्&#x200d;टडी के अनुसार एक विशेष थैरेपी ‘एम्&#x200d;प्&#x200d;टी चेयर टेक्निक’ के प्रयोग से यह सामने आया है कि ट्रांसजेंडर के मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य को बेहतर और मजबूत बनाया जा सकता है, जिससे कि वे अपने साथ होने वाले भेदभाव, उत्&#x200d;पीड़न की स्थिति का सामना बेहतर ढंग से कर सकते हैं।</p>



<p>ट्रांसजेंडर पर यह स्&#x200d;टडी अलीगंज स्थित सेंटर फॉर मेंटल हेल्&#x200d;थ- ‘फेदर्स’ की क्&#x200d;लीनिकल साइकोलॉजिस्&#x200d;ट सावनी गुप्&#x200d;ता ने की है, इसमें सावनी की मदद एमिटी यूनिवर्सिटी की मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर आयुषी गौर ने की है। इस स्&#x200d;टडी का विषय है दि इफेक्टिवनेस ऑफ एम्&#x200d;प्&#x200d;टी चेयर टेक्&#x200d;नीक ऑन साइकोलॉजिकल वेल बीइंग एमंग ट्रांसजेंडर (The Effectiveness of Empty Chair Technique on Psychological Well-being among Transgenders). यह स्&#x200d;टडी पिछले दिनों इंडियन एसोसिएशन ऑफ हेल्&#x200d;थ रिसर्च एंड वेलफेयर के प्रतिष्ठित ‘इंडियन जर्नल ऑफ पॉजिटिव साइकोलॉजी’ में वर्ष 2022 के एडीशन 13 (2) में छपी है।&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>कौन होते हैं ट्रांसजेंडर</strong><strong></strong></p>



<p>साधारण भाषा में समझा जाये तो ट्रांसजेंडर की श्रेणी में आने वाले लोग कहीं न कहीं जन्&#x200d;म से ही जेनेटिक डिस्&#x200d;ऑर्डर से ग्रस्&#x200d;त होते हैं। जैसे-जैसे ये बड़े होने लगते हैं, तब इनके अनुभव करने और इनके व्&#x200d;यवहार से पता चलता है कि ये ट्रांसजेंडर हैं। इनका बायोलॉ&#x200d;जिकली सेक्&#x200d;स फीचर ज्&#x200d;यादातर पुरुष का और बहुत कम संख्&#x200d;या में स्&#x200d;त्री का होता है, लेकिन ये अंदर से अपनी पहचान बायोलॉजिकली सेक्&#x200d;स से विपरीत महसूस करते हैं, यानी ट्रांसजेंडर्स में पुरुष का जननांग होने के बावजूद अपने अंदर स्त्रियों वाले गुण इन्&#x200d;हें महसूस होते हैं, और ये गुण इनके व्&#x200d;यवहार में परिलक्षित होते हैं, जिसे दूसरे लोग भी आसानी से समझ ले&#x200d;ते हैं।</p>



<p>सावनी बताती हैं कि इनके व्&#x200d;यवहार के सामने आते ही शुरू होती हैं इनकी मुश्किलें। वह बताती हैं कि उनके उठने-बैठने का ढंग, पहनने का ढंग, बात करने का ढंग सब अलग तरीके से होता है। समाज में इन्&#x200d;हें अलग-थलग करके देखा जाता है, इन्&#x200d;हें सब उपेक्षित तरीके से देखते हैं, बहुत बार ये लोग एब्यूज, मेंटल ट्रॉमा के शिकार हो जाते हैं, जिससे दुखी होने के बावजूद ये अपनी बात किसी से कह नहीं पाते हैं। यही नहीं उपेक्षा के चलते ही इनकी शिक्षा भी बहुत कम रह जाती है।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि दरअसल अधिकतर केस में घरवाले ही ऐसे बच्&#x200d;चे को अलग कर देते हैं, जिससे इनकी परेशानी और बढ़ जाती है। जो बच्&#x200d;चे माता-पिता से तिरस्&#x200d;कृत हो जाते हैं, उन्&#x200d;हें हिजड़ा कम्&#x200d;युनिटी स्&#x200d;वयं पालने का जिम्&#x200d;मा उठाती है, कम्&#x200d;युनिटी के लोग उसकी शिक्षा के साथ ही उसकी &nbsp;पूरी पर&#x200d;वरिश करते हैं।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>क्&#x200d;या होती है एम्&#x200d;प्&#x200d;टी चेयर टेक्निक</strong><strong> </strong></p>



<p>एम्&#x200d;प्&#x200d;टी चेयर टेक्निक के तहत जब थैरेपी दी जाती है तो उसमें व्&#x200d;यक्ति के सामने एक खाली कुर्सी रखी जाती है, और उससे कहा जाता है कि वह कल्&#x200d;पना करे कि जिससे उसे शिकायत है, या जिससे वह अपने मन की बात कहना चाहता है, वह उसके सामने कुर्सी पर बैठा है, और उसके साथ उसका वार्तालाप चल रहा है। चूंकि असलियत में तो खाली चेयर पर कोई बैठा नहीं है, ऐसे में वह व्&#x200d;यक्ति अपने सवालों का जवाब भी अपनी कल्&#x200d;पना में चेयर पर बैठे व्&#x200d;यक्ति की ओर से स्&#x200d;वयं ही देता है, जिससे उसे यह अहसास होता है कि उस व्&#x200d;यक्ति के स्&#x200d;थान पर अगर वह होता तो उसकी प्रतिक्रिया क्&#x200d;या होती, और प्रश्&#x200d;नों का वह क्&#x200d;या उत्&#x200d;तर देता, साथ ही उसे यह भी अहसास होता है कि उसकी बात से दूसरे को कितनी खुशी हो रही है और कितना दुख।&nbsp;&nbsp;</p>



<p>अपनी स्&#x200d;टडी के बारे में सावनी ने बताया कि एम्&#x200d;प्&#x200d;टी चेयर टेक्निक के तहत थैरेपी देने के लिए हमें ऐसे ट्रांसजेंडर्स का चुनाव करना था जो थैरेपी में सहयोग कर सकें, इसमें मुख्&#x200d;य रूप से ट्रांसजेंडर का शिक्षित होना आवश्&#x200d;यक था। उन्&#x200d;होंने कहा कि लखनऊ से ही इनका चुनाव करने के लिए हमने 100 से ज्&#x200d;यादा ट्रांसजेंडर्स की स्&#x200d;क्रीनिंग की, इस स्&#x200d;क्रीनिंग के तहत स्&#x200d;टडी के लिए आवश्&#x200d;यक नॉर्म्&#x200d;स, जैसे शिक्षा कम से कम कक्षा 8, किसी मानसिक रोग का इलाज न चल रहा हो और न ही कभी पहले हो चुका हो, आयु 20 से 40 वर्ष के बीच हो, लखनऊ का निवासी हो, आदि को पूरा करने वाले ट्रांसजेंडर्स को छांटा गया, इनमें सिर्फ पांच ऐसे ट्रांसजेडर मिले जो नॉर्म्&#x200d;स पूरा कर रहे थे। इनमें से एक ट्रांसजेंडर बाद में छोड़ कर चला गया। इस प्रकार चार ट्रांसजेंडर्स का प्रश्&#x200d;नोत्&#x200d;तरी के जरिये मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य का परीक्षण किया गया, इस प्रश्&#x200d;नोत्&#x200d;तरी के लिए प्रश्&#x200d;न जिन विषयों से लिये गये थे उनमें, 1.सकारात्मक आत्म-धारणा, 2.दूसरों के साथ सकारात्मक संबंध, 3.पर्यावरण की महारत, 4.स्वायत्तता, 5.जीवन में उद्देश्य और ऐसी भावनाएं, जो किसी व्यक्ति के स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, विषय शामिल थे।</p>



<p>सावनी ने बताया कि प्रश्&#x200d;नोत्&#x200d;तरी के उत्&#x200d;तर के आधार पर एक स्&#x200d;कोर आया जो कि सामान्&#x200d;य की श्रेणी से कम था। (यह स्&#x200d;कोर सामान्&#x200d;य से कम की कैटेगरी में आने पर ही थैरेपी की जरूरत होती है)। प्रश्&#x200d;नोत्&#x200d;तरी के आधार पर किया गया यह परीक्षण थैरेपी से पहले किया गया और फि&#x200d;र 45-45 मिनट के 10 सेशन की थैरेपी देने के बाद पुन: वही मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य का विश्&#x200d;लेषण-परीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि बाद में उनके द्वारा हासिल किया गया स्&#x200d;कोर पहले से बेहतर था।</p>



<p>सावनी कहती हैं कि इस प्रकार स्&#x200d;टडी के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि जब 10 सेशन में उनके साथ यह चेंज दिखे हैं तो अगर एम्&#x200d;प्&#x200d;टी चेयर टेक्निक वृहद रूप से सामाजिक स्&#x200d;तर पर की जायेगी तथा समाज में इस तरह की जागरूकता और सहयोग रहा तो ट्रांसजेंडर्स के मानसिक, शारीरिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य के साथ ही रिलेशनशिप में लाभ दिखेगा। इस प्रकार उन्&#x200d;हें कष्&#x200d;टप्रद मानसिक अवस्&#x200d;था की स्थिति से बचाया जा सकता है।</p>
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