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	<title>कपड़ा पैड &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>लॉकडाउन की मजबूरी ने सिखा दिया स्‍वच्‍छता के साथ कपड़ों के पैड का इस्‍तेमाल</title>
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		<pubDate>Wed, 27 May 2020 13:45:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="215" height="171" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/05/pad.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" />-देश&#8211;विदेश के 67 संस्‍थानों के सर्वेक्षण में सामने आयी यह जानकारी -फैक्‍टरी बंद होने से उत्‍पादन हुआ प्रभावित, स्‍कूलों में वितरण भी बंदी की भेंट चढ़ा -माहवारी स्वच्छता दिवस (28 मई) पर विशेष लखनऊ। लॉकडाउन के कारण कई जगह सेनेटरी पैड की अनुपलब्धता ने महिलाओं एवं लड़कियों को डिस्पोजेबल पैड की जगह कपड़े के पैड &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="215" height="171" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/05/pad.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" />
<p style="background-color:#aaf5d7;font-size:28px" class="has-text-color has-background has-vivid-red-color"><strong>-देश</strong><strong>&#8211;</strong><strong>विदेश के 67 संस्&#x200d;थानों के सर्वेक्षण में सामने आयी यह जानकारी</strong><strong></strong></p>



<p style="background-color:#97c8e6;font-size:28px" class="has-text-color has-background has-vivid-red-color"><strong>-फैक्&#x200d;टरी बंद होने से उत्&#x200d;पादन हुआ प्रभावित, स्&#x200d;कूलों में वितरण भी बंदी की भेंट चढ़ा</strong></p>



<p style="background-color:#bbf1db;font-size:28px" class="has-text-color has-background has-vivid-red-color"><strong>-माहवारी स्वच्छता दिवस (28 मई) पर विशेष</strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignright size-large is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/05/pad.jpg" alt="" class="wp-image-20166" width="303" height="241"/></figure></div>



<p><strong>लखनऊ।</strong> लॉकडाउन के कारण कई जगह सेनेटरी पैड की अनुपलब्धता ने महिलाओं एवं लड़कियों को डिस्पोजेबल पैड की जगह कपड़े के पैड इस्तेमाल करने पर बाध्य किया है। इस कोरोना काल में कपड़े का सेनेटरी पैड बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है। रेगुलर सेनेटरी पैड के विकल्प के रूप में कपड़े से बने पैड को 4 से 6 घंटे तक इस्तेमाल किया जाना चाहिये, पैड बदलने से पूर्व एवं बाद में हाथों की सफाई की जाए, साफ़ सूती कपडे से बने पैड ही इस्तेमाल में लाये जाएं और पैड को अच्छी तरह धोने के बाद धूप में सुखाया जाए ताकि किसी भी तरह के संक्रमण के प्रसार का खतरा कम हो सके।</p>



<p>यह खुलासा वाटर ऐड इंडिया एंड डेवलपमेंट सौलूशन द्वारा समर्थित मेंसट्रूअल हेल्थ अलायन्स इंडिया (एमएचएआई) द्वारा माहवारी स्वच्छता जागरूकता एवं उत्पाद से जुड़े संस्थानों से इस वर्ष के अप्रैल माह में सर्वेक्षण किया गया। एमएचएआई भारत में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों, शोधकर्ताओं, निर्माताओं और चिकित्सकों का एक नेटवर्क है। सर्वेक्षण में महामारी के दौरान सेनेटरी पैड का निर्माण, पैड का समुदाय में वितरण, सप्लाई चेन में चुनौतियाँ, सेनेटरी पैड की समुदाय में पहुँच एवं जागरूकता संदेश जैसे विषयों पर राय ली गयी। माहवारी स्वच्छता जागरूकता एवं उत्पाद को लेकर एमएचएआई द्वारा कराये गए सर्वे में देश एवं विदेश के 67 संस्थानों ने हिस्सा लिया।</p>



<p style="font-size:22px" class="has-text-color has-vivid-red-color"><strong>लॉकडाउन ने सेनेटरी पैड की उपलब्धता को किया प्रभावित </strong><strong></strong></p>



<p>कई राज्यों एवं जिलों में सरकार द्वारा स्कूलों में सेनेटरी पैड का वितरण किया जाता है लेकिन लॉकडाउन के कारण स्कूलों के बंद होने से बहुत सी लड़कियों एवं उनके परिवार के अन्य सदस्यों को सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। लॉकडाउन के कारण सेनेटरी पैड का निर्माण भी बाधित हुआ है जिससे ग्रामीण स्तर के रिटेल पॉइंट्स पर पैड की उपलब्धता भी बेहद प्रभावित हुयी है। गाँव के जो लोग जिला स्तर से सेनेटरी पैड की खरीदारी कर सकते थे, वह भी लॉकडाउन के कारण यातायात साधन उपलब्ध नहीं होने से वहां तक आसानी से पहुँच नहीं पा रहे हैं ।</p>



<p>सेनेटरी पैड की आसान उपलब्धता में होल सेलर्स को भी दिक्कत का सामना करन पड़ रहा है, निरंतर दो महीने तक देशव्यापी लॉकडाउन के कारण सेनेटरी पैड का होलसेल वितरण काफी प्रभावित हुआ है । यद्यपि धीरे-धीरे इसे पुनः नियमित करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन अधिक यातायात कॉस्ट ( रोड एवं हवाई भाड़ा) अभी भी चुनौती रहने वाला है। अभी सेनेटरी पैड के सीमित उत्पादन की संभावना बनी रहेगी, क्योंकि फैक्ट्री के अंदर मजदूरों को सामाजिक दूरी का ख्याल रखना होगा। इसके साथ ही जिन फैक्ट्रियों में प्रवासी मजदूरों की संख्या अधिक थी, वहाँ मजदूरों की कमी की समस्या बढ़ सकती है।</p>



<p style="font-size:28px" class="has-text-color has-vivid-red-color"><strong>67% संस्थानों को रोकना पड़ा वितरण कार्य </strong><strong></strong></p>



<p>कोविड-19 के पहले माहवारी स्वच्छता जागरूकता एवं उत्पाद से जुड़े 89% संस्थान सामुदायिक आधारित नेटवर्क एवं संस्थान के माध्यम से समुदाय तक पहुँच रहे थे, 61% संस्थान स्कूलों के माध्यम से सेनेटरी पैड वितरित कर रहे थे, 28% संस्थान घर-घर जाकर पैड का वितरण कर रहे थे, 26% संस्थान ऑनलाइन एवं 22% संस्थान दवा दुकानों एवं अन्य रिटेल शॉप के माध्यम से सेनेटरी पैड वितरण कार्य में लगे थे, लेकिन महामारी के बाद 67% संस्थानों ने अपनी सामान्य कार्रवाई को रोक दी है। कई छोटे एवं मध्य स्तरीय निर्माता सेनेटरी पैड निर्माण करने में असमर्थ हुए हैं जिसमें 25% संस्थान ही निर्माण कार्य पूरी तरह जारी किए हुए हैं तथा 50% संस्थान आंशिक रूप से ही निर्माण कार्य कर पा रहे हैं ।</p>



<p style="font-size:28px" class="has-text-color has-vivid-red-color"><strong>रॉ मेटेरियल आयात में भी दिक्&#x200d;कतें </strong><strong></strong></p>



<p>दूसरे देशों से आयात रोके जाने से कई सामग्रियों के लिए इससे चुनौती बढ़ी है। विशेषकर माहवारी कप्स के आयात में काफी मुश्किलें आयी हैं, भारत और अफ्रीका के कई मार्केटर्स यूरोप में बने कप्स को ही खरीदते हैं ताकि आइएसओ की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। अब इनके आयात में समस्या आ रही है। डिस्पोजेबल सेनेटरी पैड के लिए जरूरी रॉ मेटेरियल वुड पल्प होता है, जिसकी उपलब्धता भी लॉकडाउन के कारण बेहद प्रभावित हुयी है ।</p>



<p>लॉकडाउन के कारण ऑनलाइन बिक्री और कूरियर सेवाएं चालू नहीं थीं । इससे नियमित मांग और राहत प्रयासों दोनों को विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के बीच उत्पाद मांग की सेवा के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ा ।</p>



<p style="font-size:28px" class="has-text-color has-vivid-red-color"><strong>महिलाओं-लड़कियों का फीडबैक भी जरूरी</strong><strong></strong></p>



<p>इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वीमेन (ICRW) एशिया की टेक्निकल एक्सपर्ट सपना केडिया कहती हैं, माहवारी स्वच्छता कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए इस संबंध में महिलाओं एवं लड़कियों से भी फीडबैक लेनी चाहिए. इस फीडबैक में मासिक धर्म स्वास्थ्य उत्पादों एवं सेवाओं की उपलब्धता, पहुंच, लागत, स्वीकार्यता (गुणवत्ता और अन्य स्थानीय कारक) को शामिल करना चाहिए।</p>
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