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	<title>उच्च &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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		<title>आईवीएफ से संतान : आगाज से अंजाम तक रखना होगा अलग तरीके से ध्‍यान</title>
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		<pubDate>Fri, 02 Sep 2022 17:22:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="225" height="225" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/09/Dr.Geeta-Khanna.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/09/Dr.Geeta-Khanna.jpg 225w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/09/Dr.Geeta-Khanna-150x150.jpg 150w" sizes="(max-width: 225px) 100vw, 225px" />-बांझपन और उच्‍च जोखिम वाली गर्भावस्‍था पर चर्चा करेंगे देश भर से जुड़े विशेषज्ञ -3 और 4 सितम्‍बर को होटल क्‍लार्क्‍स अवध में आयोजित हो रही सीएमई सेहत टाइम्‍स लखनऊ। बांझपन के शिकार दम्‍पतियों के आंगन में खुशियों की सौगात देने वाली आईवीएफ टेक्निक के बारे में आज लगभग सभी जान चुके हैं। ऐसे में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="225" height="225" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/09/Dr.Geeta-Khanna.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/09/Dr.Geeta-Khanna.jpg 225w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/09/Dr.Geeta-Khanna-150x150.jpg 150w" sizes="(max-width: 225px) 100vw, 225px" />
<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-बांझपन और उच्&#x200d;च जोखिम वाली गर्भावस्&#x200d;था पर चर्चा करेंगे देश भर से जुड़े विशेषज्ञ</strong><strong></strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-3 और 4 सितम्&#x200d;बर को होटल क्&#x200d;लार्क्&#x200d;स अवध में आयोजित हो रही सीएमई</strong><strong></strong></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft size-full is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/09/Dr.Geeta-Khanna.jpg" alt="" class="wp-image-37174" width="287" height="287" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/09/Dr.Geeta-Khanna.jpg 225w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/09/Dr.Geeta-Khanna-150x150.jpg 150w" sizes="(max-width: 287px) 100vw, 287px" /><figcaption><strong><em>डॉ गीता खन्&#x200d;ना</em></strong></figcaption></figure></div>


<p><strong>सेहत टाइम्&#x200d;स</strong><strong></strong></p>



<p><strong>लखनऊ। </strong>बांझपन के शिकार दम्&#x200d;पतियों के आंगन में खुशियों की सौगात देने वाली आईवीएफ टेक्निक के बारे में आज लगभग सभी जान चुके हैं। ऐसे में इंतजार के बाद माता-पिता बनने के सुख से वंचित दम्&#x200d;पतियों के मन में इस टेक्निक के जरिये संतान सुख को पाने की लालसा जन्&#x200d;म लेने लगती है। आईवीएफ के लिए चिकित्&#x200d;सक से मिलने से लेकर स्&#x200d;वस्&#x200d;थ संतान उत्&#x200d;पन्&#x200d;न होने तक का सफर बहुत ही नाजुक और चुनौतियों से भरा होता है, क्&#x200d;योंकि थोड़ी सी भी असावधानी दम्&#x200d;पति की खुशियों में ग्रहण लगा सकती है। </p>



<p>अजंता होप सोसाइटी ऑफ रिप्रोडक्शन एंड रिसर्च (एएचएचआर), अजंता हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर, लखनऊ, इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी व लॉग्&#x200d;स के संयुक्&#x200d;त तत्&#x200d;वावधान में इस विषय पर एक सतत चिकित्&#x200d;सा शिक्षा (सीएमई) का आयोजन 3 एवं 4 सितम्&#x200d;बर को किया जा रहा है। यहां होटल क्&#x200d;लार्क्&#x200d;स अवध में होने वाले इस आयोजन में देशभर के लगभग 250 विशेषज्ञ चिकित्&#x200d;सक हिस्&#x200d;सा ले रहे हैं। इस सीएमई की थीम है बांझपन और उच्&#x200d;च जोखिम वाली गर्भावस्&#x200d;था में निर्णय लेने में आने वाली कठिनाइयों का समाधान कैसे करें। इस सीएमई में देश के नामचीन विशेषज्ञ इससे जुड़े पहलुओं पर विशेष और नयी जानकारियां साझा करेंगे, जिससे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे चिकित्&#x200d;सकों को नि:संतान दम्&#x200d;पतियों को संतान सुख देने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के मदद मिलेगी।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>उहापोह से कैसे निकलें बाहर</strong><strong></strong></p>



<p>इस बारे में इस आयोजन की चेयरपर्सन डॉ गीता खन्&#x200d;ना बताती हैं कि हर बांझ रोगी जिसे पता चलता है कि वह गर्भ धारण करने में सक्षम नहीं है, सबसे पहले उसके सामने यह प्रश्&#x200d;न होता है कि कहां जाना है, और डॉक्टरों को भी कठिनाई होती है कि निदान कैसे करें। डॉ खन्&#x200d;ना कहते हैं कि यहां आवश्&#x200d;यकता इस बात की है कि किसी भी निर्णय को लेने में समय न बर्बाद किया जाये, साथ ही यह भी ध्&#x200d;यान रखा जाये कि पहले से ही परेशान दम्&#x200d;पति की कम से कम खर्च वाली आवश्&#x200d;यक जांचों को कराकर ही उपचार की दिशा तय की जाये।</p>



<p>डॉ खन्&#x200d;ना कहती हैं कि समय का महत्&#x200d;व इसलिए भी ज्&#x200d;यादा है क्&#x200d;योंकि क्&#x200d;योंकि सामान्&#x200d;यत: आजकल विवाह होने में ही देर होती है, फि&#x200d;र दम्&#x200d;पति संतान की प्&#x200d;लानिंग करने में कुछ समय लगाते हैं, इसके पश्&#x200d;चात कुछ समय संतान की प्राप्ति की उम्&#x200d;मीद में निकल चुका होता है। यानी कुल मिलाकर पहले ही काफी समय निकल चुका होता है, यहां यह ध्&#x200d;यान रखने की बात है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे गर्भ धारण करने में भी समस्&#x200d;याएं बढ़ती हैं।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>सावधानी हटी</strong><strong>, दुर्घटना घटी</strong></p>



<p>डॉ खन्&#x200d;ना बताती हैं कि ध्&#x200d;यान रखने वाली बात यह है कि आईवीएफ से हुई प्रेगनेंसी को साधारण गर्भधारण करने की तरह नहीं ट्रीट किया जा सकता है।  उन्&#x200d;होंने बताया कि ब्&#x200d;लड प्रेशर और ब्&#x200d;लड शुगर जैसे रोग जो आम हो चुके हैं, ये संतान प्राप्ति में बाधक बन सकते हैं। इसी प्रकार अन्&#x200d;य ऐसी बातें जो साधारण गर्भावस्&#x200d;था में आम होती हैं, लेकिन आईवीएफ गर्भावस्&#x200d;था में इन पर बारीक नजर रखनी आवश्&#x200d;यक है। उन्&#x200d;होंने कहा कि ऐसे में आवश्&#x200d;यक यह है कि गर्भधारण करने में सफलता मिलने के बाद गर्भावस्&#x200d;था के दौरान और फि&#x200d;र डिलीवरी भी आईवीएफ स्&#x200d;पेशलिस्&#x200d;ट की ही देखरेख में हो।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>सिर्फ चुनिंदा टेस्&#x200d;ट ही काफी</strong><strong></strong></p>



<p>डॉ गीता खन्&#x200d;ना कहती हैं कि डॉक्टर और मरीज दोनों के मन में भ्रम की स्थिति होती है। सीएमई में इसी उहापोह से बाहर निकलने के लिए एक आसान उत्तर खोजने के व्यवस्थित दृष्टिकोण पर चर्चा की जाएगी। उन्&#x200d;होंने कहा कि इस बारे में सर गंगा राम अस्पताल दिल्ली की अनुभवी विशेषज्ञ डॉ आभा मजूमदार द्वारा जानकारी दी जायेगी जिसमें बताया जायेगा कि अनावश्&#x200d;यक टेस्&#x200d;ट न कराकर कुछ चुनिंदा टेस्&#x200d;ट करवाये जायें ताकि पहले से ही संतान न होने के कारण अवसाद से ग्रस्&#x200d;त रोगी के समय और पैसे की बचत की जा सके।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>हार्मोन का चुनाव</strong><strong></strong></p>



<p>उन्&#x200d;होंने बताया&#x200d; कि इसी प्रकार इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी की सचिव डॉ सुरवीन घूमन द्वारा बताया जायेगा कि अगर अंडाशय ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, या अंडे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, तो अंडे बनाने के लिए या अंडाशय को उत्तेजित करने के लिए किस प्रकार की महिला को कौन से हार्मोन दिये जायें।  </p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>कैसे होगा दवा का खर्च आधा</strong><strong></strong></p>



<p>उन्&#x200d;होंने बताया&#x200d; कि इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी के अध्&#x200d;यक्ष डॉ केडी नायर की नोट स्&#x200d;पीकर हैं यह एक महत्वपूर्ण हार्मोन प्रोजेस्टेरोन की भूमिका के बारे में बतायेंगे जिससे दवाओं का खर्च आधा हो जायेगा। &nbsp;डॉ खन्&#x200d;ना ने बताया कि पुरुषों में शुक्राणुओं की पर्याप्&#x200d;त संख्&#x200d;या, अच्&#x200d;छे शुक्राणुओं का आसानी से चुनाव, उनकी गुणवत्&#x200d;ता, प्रक्रिया के दौरान उनका डीएनए किस प्रकार बरकरार रखा जाये जैसी महत्&#x200d;वपूर्ण जानकारी इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी के पूर्व अध्&#x200d;यक्ष व अंतर्राष्&#x200d;ट्रीय ख्&#x200d;याति प्राप्&#x200d;त बांझपन विशेषज्ञ डॉ कुलदीप जैन देंगे।</p>



<p>डॉ गीता ने बताया कि कानपुर की प्रो मीरा अग्निहोत्री बतायेंगी कि नौ महीने तक गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए हार्मोन प्रोजेस्टेरोन भी बहुत महत्वपूर्ण हार्मोन है, लेकिन इसके उपयोग की सही विधि क्&#x200d;या है। इसी प्रकार बांझपन विशेषज्ञ दिल्ली की प्रो सोनिया मलिक बतायेंगी कि अगर किसी महिला का बार-बार गर्भपात हो रहा है तो पहले उसकी इम्यूनोलॉजी की जांच करनी चाहिये। यह देखना चाहिये कि कहीं महिला किसी एलर्जी की शिकार तो नहीं है। &nbsp;</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>आईयूआई सबके लिए नहीं</strong><strong></strong></p>



<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि इसके अतिरिक्&#x200d;त सेना के विशिष्ट सेवा पदक से सम्&#x200d;मानित दिल्ली के डॉ. पंकज तलवार बतायेंगे कि आईयूआई तकनी&#x200d;क, जिसे गरीबों का आईवीएफ भी कहा जाता है, का इस्&#x200d;तेमाल किन मरीज में करें और किन मरीजों में नहीं। ज्ञात हो अनावश्&#x200d;यक रूप प्रत्&#x200d;येक मरीज में आईयूआई करने से जहां समय की बर्बादी होती है, वहीं मरीज पर भी खर्च का भार बढ़ता है।</p>



<p>डॉ गीता खन्&#x200d;ना बताती हैं कि एडिनोमायोसिस गर्भाशय की एक बहुत ही गंभीर बीमारी है जो बांझपन के लिए जिम्मेदार है, हार्मोन्&#x200d;स के कारण होने वाली इस बीमारी को कैसे डायग्&#x200d;नोस करें,  कैसे इलाज करें इसके बारे में डॉ टी रमानी देवी जानकारी देंगी। आईवीएफ गर्भावस्था का प्रबंधन कैसे किया जाए, इसकी जानकारी पुणे की डॉ गिरिजा वाघ द्वारा दी जाएगी।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि साइंटिफि&#x200d;क कमेटी की चेयरपर्सन डॉ प्रीति कुमार बतायेंगी कि गर्भावस्&#x200d;था में मधुमेह से कैसे निपटें, क्&#x200d;योंकि मधुमेह आजकल एक बहुत ही आम बीमारी है और यह गर्भावस्था को प्रभावित करती है। डॉ प्रीति कुमार बतायेंगी कि रक्&#x200d;त में उच्&#x200d;च शर्करा का स्&#x200d;तर गर्भाशय में बढ़ते बच्चे को कैसे प्रभावित करता है।</p>



<p>इसी प्रकार दिल्&#x200d;ली के डॉ कुलदीप बतायेंगे कि गर्भावस्&#x200d;था में अल्ट्रासाउंड से बीमारियों का निदान किस प्रकार किया जाये, &nbsp;किस प्रकार उसका सही प्रयोग किया जाये, विशेष रूप से गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में जब बच्चे के अंग बन रहे हैं, यह केवल अल्ट्रासाउंड द्वारा देखा जा सकता है।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि उड़ीसा के डॉ पीएल त्रिपाठी बतायेंगे कि गर्भावस्&#x200d;था में उच्&#x200d;च रक्&#x200d;तचाप बढ़ते बच्&#x200d;चे में किन प्रकार की समस्&#x200d;याएं पैदा करता है। इसके अलावा एक पैनल चर्चा की जायेगी जिसमें मधुमेह, रक्तचाप, जुड़वाँ, बार-बार गर्भपात का इतिहास, उम्र बढ़ने वाली महिलाओं से जुड़ी उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था पर विचार-विमर्श होगा। इस चर्चा में नागपुर की डॉ सुषमा देशमुख और केजीएमयू की डॉ स्&#x200d;मृति अग्रवाल भाग लेंगी।</p>
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