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	<title>आध्यात्मिक &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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	<title>आध्यात्मिक &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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		<title>वैचारिक मंथन का अमृत : मानसिक स्वास्थ्य के लिए पारम्‍परिक शिक्षा के साथ ही आध्‍यात्मिक शिक्षा भी जरूरी</title>
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		<pubDate>Sun, 02 Oct 2022 10:55:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="448" height="195" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-55.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-55.jpg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-55-300x131.jpg 300w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" />-गोल्डन फ्यूचर धर्मार्थ संस्था के तत्‍वावधान में आयोजित हुआ मानसिक महोत्‍सव -मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की थीम पर विभिन्‍न प्रतियोगिताएं, पैनल चर्चा, व्‍याख्‍यानों का आयोजन -रक्‍तदान शिविर, खानपान, स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी लगे दर्जनों स्‍टॉल सेहत टाइम्‍स &#160; लखनऊ। प्रत्‍येक व्‍यक्ति से जुड़े विषय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर चर्चा करने के लिए शनिवार 1 अक्‍टूबर को सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट गोल्डन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="448" height="195" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-55.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-55.jpg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-55-300x131.jpg 300w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" />
<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-गोल्डन फ्यूचर धर्मार्थ संस्था के तत्&#x200d;वावधान में आयोजित हुआ मानसिक महोत्&#x200d;सव </strong><strong></strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य की थीम पर विभिन्&#x200d;न प्रतियोगिताएं</strong><strong>, </strong><strong>पैनल चर्चा</strong><strong>, व्&#x200d;याख्&#x200d;यानों का आयोजन</strong></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-रक्&#x200d;तदान शिविर</strong><strong>, खानपान, स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य सम्&#x200d;बन्&#x200d;धी लगे दर्जनों स्&#x200d;टॉल</strong><strong></strong></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-5.jpg" alt="" class="wp-image-37780" width="765" height="334" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-5.jpg 1020w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-5-300x131.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-5-768x335.jpg 768w" sizes="(max-width: 765px) 100vw, 765px" /></figure></div>


<p><strong>सेहत टाइम्&#x200d;स &nbsp;</strong><strong></strong></p>



<p><strong>लखनऊ।</strong> प्रत्&#x200d;येक व्&#x200d;यक्ति से जुड़े विषय मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य पर चर्चा करने के लिए शनिवार 1 अक्&#x200d;टूबर को सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट गोल्डन फ्यूचर के तत्&#x200d;वावधान में अन्&#x200d;य संस्&#x200d;थाओं के सहयोग से आयोजित मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य उत्&#x200d;सव में धर्मगुरु, चिकित्&#x200d;सक, कलाकार, समाजसेवक, मनोचिकित्&#x200d;सक, मनोवैज्ञानिक, आध्&#x200d;यात्मिक गुरु, शिक्षाविद, इंजीनियर, प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सहित समाज के विभिन्&#x200d;न क्षेत्रों के लोगों का यहां गोमती नगर स्थित आईएमआरटी कॉलेज में जमावड़ा लगा। दिन भर चले मंथन में जो सलाह रूपी अमृत निकला उसके अनुसार हमें अपने बच्&#x200d;चों को पारम्&#x200d;परिक शिक्षा के साथ ही आध्&#x200d;यात्मिक शिक्षा भी देनी होगी जिससे उनका आत्&#x200d;मबल, नैतिक बल भी मजबूत हो, इससे उन्&#x200d;हें जीवन को शानदार और प्रत्&#x200d;येक परिस्थिति का सामना मजबूती से करने की शक्ति प्राप्&#x200d;त होगी।</p>



<p>गोल्डन फ्यूचर के संस्थापक परामर्शदात शोभित नारायण ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधित तथ्यों पर चर्चा को हमारे समाज में लंबे समय से वर्जित माना जाता है। कई भ्रांतियों, रूढ़िवादी सोच, ज्ञान और जागरूकता की कमी के कारण मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं ने विकराल रूप ले लिया है। उन्&#x200d;होंने कहा कि विश्&#x200d;व मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य दिवस के अवसर पर इस उत्&#x200d;सव के माध्&#x200d;यम से  इस ताने-बाने को तोड़ने की लिए पहल की गयी है। इस विषय पर खुली चर्चा को स्वीकार करने और पोषित करने के लिए, एक अनुकूल वातावरण बनाने के लिए, गोल्डन फ्यूचर धर्मार्थ संस्था विश्व मानसिक स्वास्थ्य माह मनाया। इस जागरूकता अभियान के दौरान बड़ी संख्या में छात्र एवं युवा विभिन्न व्यक्तित्व विकास एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया। इससे पूर्व इससे सम्&#x200d;बन्धित दो कार्यक्रम क्रमश: सेंट जोसफ स्&#x200d;कूल और रामकृष्&#x200d;ण मठ में आयोजित हुए थे। इन कार्यक्रमों का समापन शनिवार 1 अक्&#x200d;टूबर को गोमती नगर स्थित आईएमआरटी, बिजनेस कॉलेज में आयोजित ग्रैंड फिनाले में हुआ।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-7.jpg" alt="" class="wp-image-37781" width="765" height="334" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-7.jpg 1020w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-7-300x131.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-7-768x335.jpg 768w" sizes="(max-width: 765px) 100vw, 765px" /></figure></div>


<p>इस कार्यक्रम में विविध वार्ताएं, विभिन्न संस्थागत प्रमुखों द्वारा पैनल चर्चा, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए सांस लेने की क्रिया और वेगस तंत्रिका सक्रियण पर एक कार्यशाला भी आयोजित हुई। समारोह में मानसिक स्वास्थ्य और कल्याणकारी सामुदायिक हितधारकों के 30 से अधिक स्टॉल लगाये गये।</p>



<p>शोभित नारायण ने बताया कि गोल्डन फ्यूचर द्वारा आयोजित इस विश्व मानसिक स्वास्थ्य माह उत्सव के समापन समारोह को प्रतिष्ठित व्यक्तियों और लखनऊ के निवासियों के सहयोग से आयोजित किया गया। इनमें इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोसाइंसेज, आईएमआरटी बिजनेस कॉलेज, सेंट जोसेफ कॉलेज, गौरांग क्&#x200d;लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्&#x200d;योपैथिक रिसर्च, राम कृष्ण मठ, ब्रह्मकुमारी, फेदर्स (सेंटर फॉर मेंटल हेल्&#x200d;थ), लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन और कई अन्य पेशेवर, प्रशासनिक, सामाजिक और शैक्षिक संगठन जैसे निकाय शामिल रहे।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>शिक्षा व्&#x200d;यवस्&#x200d;था में मन की शिक्षा भी जरूरी : स्&#x200d;वामी मुक्तिनाथानंद </strong><strong></strong></p>



<p>प्रथम सत्र में आयोजित सर्व धर्म सम्&#x200d;मेलन में राम कृष्&#x200d;ण मठ, विवेकानंद पॉलीक्&#x200d;लीनिक के सचिव स्वामी मुक्तिनाथानंद ने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में मन की शिक्षा नहीं दी&nbsp; जाती। जिसे परा विद्या कहते हैं जिसका वर्तमान शिक्षा में अभाव है। मुझे हर्ष हो रहा है कि&#x200d; गोल्डेन फ्यूचर इस और समाज का ध्यान आकर्षित कर रहा है।&nbsp;</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" loading="lazy" width="1020" height="445" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-6.jpg" alt="" class="wp-image-37786" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-6.jpg 1020w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-6-300x131.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-6-768x335.jpg 768w" sizes="(max-width: 1020px) 100vw, 1020px" /></figure></div>


<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>आध्&#x200d;यात्मिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य भी होना चाहिये ठीक : ब्रह्मकुमारी राधा</strong><strong></strong></p>



<p>ब्रह्मकुमारी राधा ने कहा कि हमारा प्रिय मित्र हमारा मन होता है, मानसिक, शारीरिक, स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारा आध्यात्मिक स्वास्थ्य भी स्वस्थ होना चाहिये। जो कि हमारे मन को उर्जा प्रदान करता है और मन हमारे शरीर को सकारात्मक कार्यों के लिए उर्जा प्रदान करता है। </p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>अहम् भाव के कारण मानसिक अस्&#x200d;वस्&#x200d;थता : डॉ ऐबल</strong><strong></strong></p>



<p>फादर डॉ. ऐबल ने कहा कि आज मानसिक स्वास्थ्य के अस्वस्थ होने का सबसे बड़ा कारण अहं भाव है (I&#8217;M) यदि हम I के स्थान पर शून्य (0- son of god) समझ लें तो मन को कोई भी रोग ग्रसित नहीं कर सकता और हम मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे। इसके लिये हमें स्वयं को जानना होगा अगर हम स्वयं को नहीं जानेंगे तो परमेश्वर भी हमें नहीं जानता।&nbsp;</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>मन की मजबूती के बिना एक कदम भी चलना असंभव : स्&#x200d;वामी चैतन्&#x200d;य</strong><strong></strong></p>



<p>स्वामी कौशिक चैतन्य ने आध्यात्मिकता का मानसिक स्वास्थ्य पर महत्व बताते हुए कहा कि प्रत्येक इंद्रियों, विचारों, भावनाओं, क्रियाकलाप के अंदर जो सामर्थ्य होता है, वही मन है। उन्होंने कहा कि अगर मन मजबूत नहीं है तो हम चाहे कितने भी बलशाली क्यों न हो एक कदम आगे नहीं बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा विश्व में सबसे पहले मन से हारने वाले व्यक्ति अर्जुन थे। उन्होंने कहा कि जब महाभारत का युद्ध चल रहा था उस समय अर्जुन रथ के पिछले हिस्से में बैठ जाते हैं और कहते हैं कि मुझ से युद्ध नहीं होगा, भगवान कृष्ण उन्हें समझाते हैं इसके बाद ही अर्जुन युद्ध के लिए खड़े होते हैं। स्वामीजी ने कहा कि जब मन व्यथित हो और किसी निर्णय को लेने में सक्षम न हो तो किसी काबिल व्यक्ति के समक्ष अपने मन को सरेंडर कर देना चाहिए और फिर उस व्यक्ति की दिखायी राह पर चलना चाहिए।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-8jpg.jpg" alt="" class="wp-image-37785" width="569" height="521" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-8jpg.jpg 972w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-8jpg-300x275.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-8jpg-768x703.jpg 768w" sizes="(max-width: 569px) 100vw, 569px" /></figure></div>


<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>सहिष्&#x200d;णुता भरा व्&#x200d;यवहार जरूरी : डॉ नवीन</strong><strong></strong></p>



<p><br>क्रिश्चियन कम्युनिटी के फादर डॉ नवीन सेमुअल ने कहा कि सभी मनुष्यों को एक दूसरे की पीड़ा को समझना चाहिए उन्होंने कहा कि चाहे माता-पिता हों अथवा अन्य कोई, सभी के साथ सहिष्णुता भरा व्यवहार करना चाहिए। ध्यान रहे आप जो देंगे वही वापस आपके पास आएगा।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>सांसों की लय का मन से सीधा सम्&#x200d;बन्&#x200d;ध</strong> <strong>: समर्थ नारायण</strong></p>



<p><br>आर्ट ऑफ लिविंग के समर्थ नारायण ने कहा कि आत्मीयता का भाव ही अध्यात्म है। उन्होंने कहा कि आपकी सांस किस लय में चल रही है यह आपके आपकी मन की स्थिति पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, हर प्रकार के मन की अवस्था में सांसों की लय बदल जाती है। उन्होंने कहा कि सांसों की लय को बदलकर मन की अवस्था को भी बदला जा सकता है।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>इच्&#x200d;छा कभी भरती नहीं : सुफि&#x200d;यान निजामी</strong><strong></strong></p>



<p><br>मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली के प्रतिनिधि सुफियान निजामी ने कहा कि समाज में मोहब्बत का ढांचा टूट गया है इंसानों की मानसिक इच्छा ऐसी होती है कि अगर उन्हें एक सोने का जंगल मिल जाए तो उन्हें एक और जंगल की चाहत होगी उन्होंने कहा कि&#x200d; मजहब के बिना सुकून नहीं मिलता है।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>रथ शरीर</strong><strong>, </strong><strong>सारथी मन : डॉ कृष्&#x200d;ण दत्&#x200d;त</strong></p>



<p><br>केजीएमयू में मनोवैज्ञानिक रह चुके डॉ कृष्ण दत्त ने रथ से उदाहरण देते हुए बताया कि रथ हमारा शरीर है, रथ में जुते हुए घोड़े हमारी इंद्रियां (आंख, नाक, कान, जीभ और त्&#x200d;वचा) हैं, रथ चलाने वाला सारथी मन है, मन के हाथ में गति नियंत्रक यानी चाबुक और लगाम होता है, यह चाबुक और लगाम हैं बुद्धि और विवेक, रथ में पीछे बैठा हुआ जो व्&#x200d;यक्ति है वह आप स्&#x200d;वयं हैं अगर मन मनमानी करने लगेगा तो इंद्रिया आपको कहीं भी जाकर भिड़ा देंगी लेकिन अंतर्मन की आत्&#x200d;मा की आवाज जो सुनेगा तो जैसे कि रथ चलाने वाला पीछे बैठे व्&#x200d;यक्ति से पूछता है कि मैं ठीक चल रहा हूं और फि&#x200d;र सही मार्ग पर चलता है और अगर वह सलाह नहीं लेगा तो उसके हाथ में जो गति नियंत्रक हैं वे उसके नौकर हो जाते हैं बुद्धि विवेक नहीं बनती है बल्कि वह उसकी असिस्&#x200d;टेंट हो जाती है। उन्&#x200d;होंने कहा कि स्वास्थ्य यानी स्&#x200d;व-स्थित में मानसिक स्वास्थ्य पहले और शारीरिक स्वास्थ्य बाद में है, इसमें दोनों स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य &nbsp;शामिल है। उन्होंने कहा जीवन में रस का सृजन रखिये, जब लगे कि रस सूख रहा है तब बुजुर्गों से सलाह लीजिये। उन्&#x200d;होंने कहा कि आज तीन एम हमारी जरूरत बन गये हैं, पहला एम है मोबाइल, दूसरा एम है मनी तथा तीसरा एम है माइंड लेकिन इन्&#x200d;हें अपने ऊपर हावी न होने दें इन्&#x200d;हें मास्&#x200d;टर न बनने दें।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>दवा और थैरेपी दोनों ही आवश्&#x200d;यक : डॉ शबरी दत्&#x200d;ता </strong><strong></strong></p>



<p>नूर मंजिल साइकाइट्रिक सेंटर की मनोचिकित्सक डॉ शबरी दत्ता ने कहा के महिलाओं के लिए मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य का बहुत महत्&#x200d;व हैं क्&#x200d;योंकि उन्&#x200d;हें कई प्रकार की मन:स्थितियों का सामना करना पड़ता है। डॉ शबरी ने बताया कि प्रसव के बाद महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या होने की संभावना ज्यादा रहती है, विशेषकर अगर कोई समस्या पहले से ही हो तो। उन्होंने कहा मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्&#x200d;त करने के लिए दवा और थेरेपी दोनों की मदद लेनी चाहिए, थैरेपी दवा का काम आसान कर देती है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-2.jpg" alt="" class="wp-image-37782" width="707" height="359" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-2.jpg 877w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-2-300x152.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-2-768x390.jpg 768w" sizes="(max-width: 707px) 100vw, 707px" /></figure></div>


<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>पैनल चर्चा में रखे गये महत्&#x200d;वपूर्ण विचार </strong><strong></strong></p>



<p>दूसरे सत्र में पैनल चर्चा का आयो&#x200d;जन किया गया जिसमें गौरांग क्&#x200d;लीनिक एंड रिसर्च फॉर होम्&#x200d;योपैथिक रिसर्च के चीफ कन्&#x200d;सल्&#x200d;टेंट डॉ गिरीश गुप्&#x200d;ता ने कहा है कि जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूं कि मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य की भूमिका व्&#x200d;यक्ति के स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य में अहम है, इसे विश्&#x200d;व स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य संगठन ने भी माना है, इसीलिए उसने स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य की परिभाषा में बाद में मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य को शामिल किया था।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि आज गैर संचारी रोग बहुत बढ़ गये हैं, इनमें अनेक रोगों का कारण मानसिक सोच है, स्त्रियों को होने वाले शारीरिक रोग, त्&#x200d;वचा के रोगों के मरीजों पर की गयी रिसर्च बताती हैं कि इसका कारण मानसिक सोच पाया गया है।&nbsp; उन्&#x200d;होंने कहा कि जहां तक मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य का आर्थिक स्थिति से विशेष सम्&#x200d;बन्&#x200d;ध की बात है तो मैं समझता हूं कि ऐसा नहीं है। उन्&#x200d;होंने कहा कि बल्कि देखा जाये तो मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य की समस्&#x200d;या आर्थिक रूप से विपन्&#x200d;न व्&#x200d;यक्तियों से ज्&#x200d;यादा आर्थिक रूप से सम्&#x200d;पन्&#x200d;न व्&#x200d;यक्तियों में ज्&#x200d;यादा पायी जा रही हैं। उन्&#x200d;होंने कहा कि इसकी एक बड़ी वजह ईर्ष्&#x200d;या है। उन्&#x200d;होंने कहा कि आज व्&#x200d;यक्ति दूसरों को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहता है।</p>



<p>डॉ गुप्&#x200d;ता ने इसके लिए एक कहानी से उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्&#x200d;यक्ति ने भगवान से अपने लिए घर होने का वरदान मांगा, जिसे भगवान ने पूरा कर दिया। फि&#x200d;र उसकी इच्&#x200d;छा और बढ़ी तो उसने भगवान से गाड़ी की मांग की तो भगवान ने कहा कि तुम्&#x200d;हें गाड़ी या जो भी सामान मांगोंगे मैं दे दूंगा लेकिन मेरी एक शर्त है कि जो तुम मांगोगे, वह तुमने दोगुना तुम्&#x200d;हारे पड़ोसी को दूंगा। व्&#x200d;यक्ति तैयार हो गया, लेकिन जब उसने चीजों को अपने से दोगुनी संख्&#x200d;या में पड़ोसी के पास देखा तो उसे ईर्ष्&#x200d;या होने लगी। उसने भगवान से वरदान मांगते हुए कहा कि मेरी एक आंख फोड़ दीजिये, और जब उसने पड़ोसी को देखा तो उसकी दोनों आंखें जा चुकी थीं और वह लाठी लेकर चल रहा था। अब व्&#x200d;यक्ति यही अपने मन में सोच कर खुश था कि कोई बात नहीं मेरी तो एक आंख की रोशनी गयी है, लेकिन कम से कम पड़ोसी की तो दोनों आंखें खराब हुई हैं। यानी अपनी ईर्ष्&#x200d;या में उसने अपनी भी एक आंख गंवा दीं।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>श्रमिक वर्ग को बतायें उसके और परिवार के अधिकार</strong><strong></strong></p>



<p>लेबर विभाग के डॉ महेश कुमार पाण्&#x200d;डेय ने लेबर क्&#x200d;लास की मन:स्थिति उनके मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य पर की गयी चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि आप लोग जब भी किसी लेबर को मायूस देखें तो उससे पूछें कि क्&#x200d;या आपने लेबर विभाग में अपना पंजीकरण कराया है तो उसका तुरंत उत्&#x200d;तर होगा कि इससे हमें क्&#x200d;या मिलेगा। डॉ महेश कुमार पाण्&#x200d;डेय ने कहा कि जिन श्रमिक का पंजीकरण होता है उनके परिवार का आयुष्&#x200d;मान कार्ड बन जाता है जिससे माध्&#x200d;यम से पांच लाख रुपये तक का इलाज नि:शुल्&#x200d;क कराने की सुविधा मिलती है। इसके अलावा श्रमिक परिवार के बच्&#x200d;चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय शुरू होने जा रहे हैं।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:26px"><strong>मानसिक स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य पर बात करिये</strong><strong>, हिचकिचाइये नहीं : डॉ प्रांजल अग्रवाल</strong></p>



<p>निर्वाण हॉस्पिटल के डाइरेक्&#x200d;टर डॉ प्रांजल अग्रवाल ने कहा कि&#x200d; आज देश का युवा नशे में डूबता जा रहा है। युवा मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, लॉ कॉलेजों या किसी भी क्षेत्र में स्&#x200d;टडी कर रहे हों, वे नशे के शिकार हो रहे हैं। पिछले 1 साल से यह देखा गया है कि महिलाओं और लड़कियों में नशे के सेवन की प्रवृत्ति बढ़ गई है, उन्&#x200d;हें एडमिट करना पड़ रहा है। यह अत्&#x200d;यन्&#x200d;त चिंताजनक है।</p>



<p>डॉ प्रांजल अग्रवाल ने कहा कि&#x200d; सोचकर देखिये कि आज से 20 साल बाद की स्थिति क्&#x200d;या होगी। उन्&#x200d;होंने कहा कि आज का युवा कल देश चलाने की तैयारी कर रहा है, और ऐसे में जब देश चलाने वाले इस तरह नशे के आदी होंगे तो देश कैसे आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि चाहें किसी भी तरह से युवाओं को इस नशे की लत से विरत करने के लिए इस पर सरकार को भी कदम उठाने की आवश्यकता है।</p>



<p>डॉ प्रांजल अग्रवाल ने कहा कि&#x200d; लोगों में यह स्टिग्मा है कि अगर वह अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बताएंगे तो लोग उसे पागल न समझ लें। उन्होंने कहा कि आजकल परिवार के लोगों में आपस में भी संवाद का अभाव है। डाइनिंग टेबल पर चार लोग अगर बैठे हैं तो चारों अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त नजर आएंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि&#x200d; घर के सभी सदस्य कम से कम एक टाइम का भोजन एक साथ किया करें, और उस दौरान उनके मोबाइल अलग रख दिये जाएं। पैनल चर्चा में संस्&#x200d;कृति विभाग के अभय जैन, अन्&#x200d;तर्राष्&#x200d;ट्रीय बौद्ध शोध संस्&#x200d;थान के अध्&#x200d;यक्ष भदन्&#x200d;त शान्ति मित्र, आर्ट ऑफ लिविंग के तनुज ने भी अपने विचार रखे। </p>


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<figure class="aligncenter size-full is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-4.jpg" alt="" class="wp-image-37784" width="765" height="334" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-4.jpg 1020w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-4-300x131.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2022/10/Mental-health-4-768x335.jpg 768w" sizes="(max-width: 765px) 100vw, 765px" /></figure></div>


<p>इस अवसर पर रक्&#x200d;तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। उत्&#x200d;सव में इसके अतिरिक्&#x200d;त होम्&#x200d;योपैथी, मनोवैज्ञानिक, आयुर्वेदिक, आर्ट ऑफ लिविंग,  सहित स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य, खाने-पीने की वस्&#x200d;तुओं से  सम्&#x200d;बन्&#x200d;घी कई स्&#x200d;टॉल लगाये गये। शोभित अग्रवाल ने महोत्&#x200d;सव की सफलता के लिए इस मिशन में लगी टीम के सभी सहयोगियों विशेषकर नूरमंजिल हॉस्पिटल की साइकोलॉजिस्&#x200d;ट डॉ अंजली गुप्&#x200d;ता, आईएमआरटी बिजनेस कॉलेज के निदेशक डॉ डीआर बंसल, गौरांग क्&#x200d;लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्&#x200d;योपैथिक रिसर्च के चीफ कंसल्&#x200d;टेंट डॉ गिरीश गुप्&#x200d;ता, ‘फेदर्स’ (सेंटर फॉर मेंटल हेल्&#x200d;थ) की फाउंडर क्&#x200d;लीनिकल साइकोलॉजिस्&#x200d;ट सावनी गुप्&#x200d;ता, गोल्&#x200d;डन फ्यूचर पब्लिक चेरीटेबिल ट्रस्&#x200d;ट की फाउंडर ट्रस्&#x200d;टी कुमकुम अग्रवाल, पति परिवार कल्&#x200d;याण समिति के कपिल मोहन चौधरी, हस्&#x200d;त शिल्&#x200d;प कला केंद्र की पुनीता भटनागर, परवरिश निरालानगर की कुसुम सहित पूरी टीम का आभार व्&#x200d;यक्&#x200d;त किया।</p>
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