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	<title>Uncategorized Archives - Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 17:12:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>क्या आप जानते हैं कि 200 ग्राम का के भजन वाले मोबाइल कर देखने के लिएवाला आपके स्मार्टफोन को क्या आप जानते हैं कि आपका स्मार्फोन क्या आप जानते हैं कि आपका स्मार्टफोन आपके हाथों को भले ही 200 ग्राम का वजन दे रहा है लेकिन यही स्मार्टफोन जब आप देखते हैं तो आपकी गर्दन &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>क्या आप जानते हैं कि 200 ग्राम का के भजन वाले मोबाइल कर देखने के लिएवाला आपके स्मार्टफोन को क्या आप जानते हैं कि आपका स्मार्फोन क्या आप जानते हैं कि आपका स्मार्टफोन आपके हाथों को भले ही 200 ग्राम का वजन दे रहा है लेकिन यही स्मार्टफोन जब आप देखते हैं तो आपकी गर्दन पर 25 किलो का बोझ पड़ता है</p>
<p>आज के समय में सिरदर्द, गर्दन का दर्द और चेहरे का दर्द बहुत सामान्य स्वास्थ्य समस्याएँ बनती जा रही हैं। बढ़ता हुआ तनाव और लंबे समय तक मोबाइल फोन का उपयोग इन समस्याओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत में लगभग 60–65% लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी सिरदर्दकी समस्या होती है। इनमें टेंशन-टाइप Headache सबसे आम प्रकारों में से एक है, जो लगभग 30–35% लोगों में पाया जाता है। इसी तरह माइग्रेन भी भारत में लगभग 30–35% लोगों को प्रभावित करता है और यह काम करने की क्षमता तथा जीवन की गुणवत्ता को काफी कम कर सकता है।</p>
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<p>एक अन्य महत्वपूर्ण लेकिन कम पाया जाने वाला रोग ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया है। यह 1% से भी कम लोगों में होता है, लेकिन इसमें चेहरे में बहुत तेज और असहनीय दर्द होता है, जिससे रोजमर्रा की गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं। इसके अलावा सर्वाइकोजेनिक Headache, जो गर्दन की हड्डियों (सर्वाइकल स्पाइन) की समस्या से होता है, अक्सर सही तरीके से पहचाना नहीं जाता और इसे दूसरे प्रकार के Headache समझ लिया जाता है।</p>
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<p>कुछ अन्य बीमारियाँ भी ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया जैसी लग सकती हैं, जैसे ट्राइजेमिनल न्यूरोपैथी और एटिपिकल फेसियल पेन। इसलिए सही निदान बहुत जरूरी है। जिन मरीजों को सामान्य दवाइयों से आराम नहीं मिलता, उनके लिए स्फेनोपैलेटाइन गैंग्लियन ब्लॉक और रेडियोफ्रीक्वेंसी लेज़निंग जैसे आधुनिक दर्द उपचार से राहत मिल सकती है।</p>
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<p>Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences के दर्द विशेषज्ञ 14–15 मार्च को आयोजित SPARC 2026 के दौरान युवा दर्द विशेषज्ञों के साथ Headache, गर्दन और चेहरे के दर्द से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा चिकित्सकों के क्लिनिकल अनुभव को बढ़ाना, जागरूकता बढ़ाना और इन रोगों के बेहतर निदान और उपचार को बढ़ावा देना है। साथ ही Uttar Pradesh की आम जनता में भी इन दर्द संबंधी समस्याओं की पहचान और उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।</p>
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<p>रील दे रहा है सर दर्द</p>
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<p>लखनऊ। 110 ग्राम से 250 ग्राम तक के वजन वाला आपका स्मार्टफोन आपकी गर्दन को देता है 25 किलोग्राम का बोझ। इसका नतीजा यह होता है कि लंबे घंटे घंटे तक मोबाइल देखने वाले  लगोंलंबे समय तक रेल देखनेआपकी स्मार्टनेस छीन रहा है इसकी वजह है इसको देखने के दौरान गार्डन पर पढ़नेवले</p>
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<p>यदि सिर दर्द, माइग्रेन या कंधे-गर्दन के दर्द में दो-तीन महीने तक दवा लेने के बावजूद आराम नहीं मिल रहा और दवा बंद करते ही दर्द फिर शुरू हो जाता है, तो केवल दवाओं पर निर्भर रहना समाधान नहीं है। इसके पीछे अक्सर गर्दन के आसपास की मांसपेशियों और नसों में तनाव जिम्मेदार होता है। ऐसे मामलों में नर्व ब्लॉक तकनीक प्रभावी उपचार साबित हो सकती है।</p>
<p>यह जानकारी संजय गांधी पीजीआई के पेन क्लिनिक मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर संदीप खुबा, प्रोफेसर सुजीत गौतम,प्रो चेतना तथा विभागाध्यक्ष प्रो. संजय धीराज ने दी। उन्होंने बताया कि इस विषय पर विभाग की ओर से दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है, जिसमें दर्द के आधुनिक उपचार और नर्व ब्लॉक तकनीक के बारे में शिक्षकों व युवा चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।</p>
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<p>विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं लेने से किडनी और लिवर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए जिन मरीजों में दर्द बार-बार लौट आता है, उनमें कारण का सही मूल्यांकन कर उपचार किया जाना चाहिए।</p>
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<p>उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 60 से 65 प्रतिशत लोग जीवन में कभी न कभी सिर दर्द से प्रभावित होते हैं। इनमें से 30 से 35 प्रतिशत मरीजों में टेंशन टाइप हेडेक तथा 20 से 25 प्रतिशत में माइग्रेन पाया जाता है। इसके पीछे मोबाइल पर्व रील देखना बड़ा कारण है।</p>
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<p>लगातार मोबाइल देखने से गर्दन की मांसपेशियों में लगातार तनाव के कारण वहां की नसें प्रभावित हो जाती हैं। ऐसे मरीजों में सिंपैथेटिक नर्व ब्लॉक या अन्य नर्व ब्लॉक प्रक्रियाओं से दर्द के संकेतों को अस्थायी रूप से रोककर राहत दी जाती है। इस तकनीक में विशेष सुई के माध्यम से प्रभावित नस के आसपास दवा दी जाती है, जिससे दर्द का चक्र टूट जाता है और मरीज को लंबे समय तक राहत मिल सकती है।</p>
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<p>उन्होंने सलाह दी कि लगातार सिर या गर्दन के दर्द से परेशान मरीजों को विशेषज्ञ से परामर्श लेकर पेन क्लिनिक में जांच करानी चाहिए।</p>
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<p>मोबाइल देखने से गर्दन पर पड़ता है 25 किलो का भार</p>
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<p>विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फोन को झुककर देखने की आदत सिर और गर्दन के दर्द का बड़ा कारण बन रही है। सामान्य स्थिति में गर्दन पर सिर का भार लगभग 5 से 6 किलोग्राम होता है, लेकिन जब व्यक्ति मोबाइल देखने के लिए सिर झुका लेता है तो यह भार बढ़कर 25 से 30 किलोग्राम तक हो जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने से गर्दन की मांसपेशियां तनावग्रस्त हो जाती हैं और आसपास की नसों पर दबाव पड़ने लगता है, जिससे सिर दर्द, कंधे का दर्द और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है।</p>
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